रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. जिले में कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन किए जाने से नाराज शिक्षकों ने जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा. जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में गतिमान समायोजन प्रक्रिया के खिलाफ जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की गई. शनिवार को सैकड़ों की संख्या में एकत्रित होकर बेसिक शिक्षा विभाग रायबरेली में गतिमान समायोजन प्रक्रिया में कोर्ट के आदेश के विपरीत नियम विरुद्ध ढंग से कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन सूची में नाम आने के कारण सैकड़ों शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय को ज्ञापन दिया. जिलाधिकारी की तरफ से सिटी मजिस्ट्रेट महोदय ने ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि जो अधिकतर जनपद में हो रहा है वहीं रायबरेली में भी होगा.

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी आश्वासन देते हुए कहा कि हम शिक्षकों के हितों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे. कनिष्ठ शिक्षकों की तरफ से अनुराग मिश्र ने बताया कि सन 2018 और सन 2024 में उच्च न्यायालय द्वारा कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन को रद्द किया जा चुका है, किंतु जनपद रायबरेली में मनमाने ढंग से जारी की गई सूची में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस दिखाया गया है, जिससे शिक्षकों में बहुत ज्यादा निराशा और आक्रोश व्याप्त है. उन्होंने कहा कि विसंगतियों के साथ में सूची भी जारी की गई है. कनिष्ठ शिक्षकों का पक्ष रखते हुए वरुणेंद्र ने बताया कि अभी अगस्त 2025 में ही कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया गया था. दोबारा फिर यदि उनका समायोजन किया जाता है तो वे जिस विद्यालय में जाएंगे वहां भी कनिष्ठ होंगे. इस तरह तो बार-बार उन्हीं का समायोजन होता रहेगा और वह फुटबॉल की भांति इधर से उधर फेंके जाएंगे.

इसे भी पढ़ें : सड़क चौड़ीकरण के नाम पर व्यापारियों के उत्पीड़न का आरोप, कांग्रेस ने मुआवजे की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

कनिष्ठ शिक्षक सत्येंद्र सिंह का कहना है कि पूरे प्रदेश में समायोजन प्रक्रिया गतिमान है और 40 से ज्यादा जनपदों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है, लेकिन रायबरेली और सात-आठ जनपदों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है. समायोजन प्रक्रिया की विसंगतियों के विषय में बताते हुए दुर्गेश मिश्र और अखिलेश सिंह ने कहा कि इस समायोजन में प्रधानाध्यापक को भी सहायक अध्यापक के रूप में गिना जा रहा है जो कि नियम विरुद्ध है. वरिष्ठता सूची बनाते समय विद्यालय की जॉइनिंग देखी जा रही है, यह भी नियम विरुद्ध है. वरिष्ठता सूची का निर्धारण करते समय हमेशा जिले की नियुक्ति तिथि को आधार माना जाता है. शिक्षकों ने एक स्वर में यह भी कहा कि यदि पुनः कनिष्ठ शिक्षकों का ही समायोजन किया जाएगा तो वह लोग न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे.