सत्या राजपूत, रायपुर। खेलते-खेलते एक मासूम की जिंदगी का यूं खत्म हो जाना महज हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है, जिसकी लापरवाही की कीमत अब एक परिवार अपने 5 साल के बेटे को खोकर चुका रहा है। अम्लीडीह में खुले नाले में गिरने से मासूम काव्यांश की मौत ने एक बार फिर रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नाले की स्थिति को लेकर स्थानीय लोग बार-बार शिकायत कर रहे थे, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? काव्यांश की मौत ने सिर्फ उसके परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि शहर की उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया है, जो हादसे के बाद जागने की आदत बना चुकी है।

शिकायतें होती रहीं, नाला खुला रहा
स्थानीय लोगों के मुताबिक अम्लीडीह इलाके में नाले का काम अधूरा पड़ा था। खुले हिस्से के कारण यहां पहले से खतरा बना हुआ था। लोगों का दावा है कि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायतें भी पहुंचाई गई थीं। इसके बावजूद स्थिति नहीं बदली। अब उसी खुले नाले में गिरने से 5 साल के काव्यांश की जान चली गई।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि नाले को लेकर पहले से शिकायतें थीं तो उसे सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन और नगर निगम को ऐसे खतरनाक स्थानों की जानकारी गंभीरता से लेनी होगी?
मौके पर पहुंचे आकाश तिवारी, निगम पर लगाए लापरवाही के आरोप
घटना की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और बच्चे की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

तिवारी ने घटना को महज हादसा मानने से इनकार करते हुए इसे नगर निगम की लापरवाही का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने खुले नाले को लेकर पहले भी शिकायत की थी, लेकिन नाले का काम पूरा नहीं कराया गया।
उनका कहना था कि अगर समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती और नाले को सुरक्षित किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
15 दिन में सभी खुली नालियां ढकने की मांग
आकाश तिवारी ने नगर निगम और जिला प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग है कि पूरे मामले की तत्काल जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। दूसरी मांग पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की है। तीसरी और अहम मांग शहर की सभी खुली नालियों को 15 दिनों के भीतर ढकने की है।

तिवारी ने कहा कि शहर में जगह-जगह खुले नाले और गड्ढे लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम अब भी नहीं चेता तो आने वाले समय में ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। उनका सवाल है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा और कब खुले नालों को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी।
हीरापुर-जरवाए और अस्पताल हादसे का भी जिक्र
आकाश तिवारी ने रायपुर में सामने आए दूसरे हादसों का भी उल्लेख किया। उन्होंने हीरापुर-जरवाए में मकान के गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत का जिक्र किया।
इसके अलावा रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में दो सफाई कर्मचारियों की मौत का मामला भी उन्होंने उठाया। तिवारी का कहना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं शहर की व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती हैं।
उनके अनुसार ड्रेनेज सिस्टम की कमी कहीं बीमारी का कारण बन रही है तो कहीं खुले नाले और गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं।
महापौर ने माना- खुले नाले से समस्या हो रही
घटना को लेकर महापौर मीनल चौबे ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू किया और बच्चे का शव बाहर निकाला।
महापौर ने कहा कि जान से बड़ी कोई चीज नहीं है। उन्होंने माना कि खुले नाले की वजह से समस्या हो रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नालियों को पूरी तरह ढक देने से सफाई में परेशानी आती है और कई बार नाली जाम होने की स्थिति बन जाती है। अब निगम इस समस्या का क्या समाधान निकालता है, इस पर आगे विचार किया जाएगा।
मुआवजे पर महापौर और कमिश्नर ने दी अलग-अलग स्थिति
हादसे के बाद पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग भी उठी है। महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम की ओर से मुआवजा दिया जा सकता है या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि वे अधिकारियों से बात कर इस संबंध में जानकारी लेंगी।
वहीं नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा ने मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नगर निगम में मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। उनके अनुसार मुआवजा राजस्व विभाग के माध्यम से दिया जाता है।
कमिश्नर ने मामले की जांच की बात कही। उनका कहना है कि शिकायत प्रतिवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ जांच और संवेदना से कैसे रुकेगा हादसों का सिलसिला?
काव्यांश की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि हादसे के बाद जांच और संवेदना से आगे क्या होगा?
शहर के कई हिस्सों में खुले नाले, अधूरे ड्रेनेज सिस्टम और गड्ढे अब भी दिखाई देते हैं। बरसात के दौरान इनका खतरा और बढ़ जाता है। कई जगह पानी भर जाने के कारण सड़क और नाले के बीच का अंतर भी पता नहीं चलता। ऐसे हालात में बच्चों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
स्मार्ट सिटी के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं का सवाल
रायपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। शहर में आधुनिक सड़कें, स्मार्ट लाइटिंग और डिजिटल सुविधाओं को विकास की तस्वीर के तौर पर पेश किया जाता है।
लेकिन दूसरी तरफ शहर के कई इलाकों में सुरक्षित ड्रेनेज, ढकी हुई नालियां और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान जैसी बुनियादी जरूरतें अब भी चुनौती बनी हुई हैं।
अम्लीडीह में काव्यांश की मौत ने इसी अंतर को सामने ला दिया है। सवाल यह है कि अगर किसी शहर को स्मार्ट बनाने के लिए बड़ी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो वहां खुले नाले और खतरनाक गड्ढे लोगों की जान के लिए खतरा क्यों बने हुए हैं?
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
हादसे के बाद स्थानीय अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। माता-पिता के सामने अब यह डर है कि बच्चों को घर से बाहर खेलने भेजते समय कहीं कोई खुला नाला या गड्ढा उनके लिए खतरा न बन जाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि किसी भी शहर के विकास का पहला पैमाना उसके नागरिकों की सुरक्षा होना चाहिए। बड़े प्रोजेक्ट और चमकदार विकास तभी सार्थक हैं, जब शहर की गलियों और मोहल्लों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण मिले।
अब कार्रवाई की बारी

काव्यांश की मौत के बाद नगर निगम और प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। क्या खुले नालों की पहचान कर उन्हें समय रहते सुरक्षित किया जाएगा? क्या पहले की गई शिकायतों की जांच होगी? क्या जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी? और क्या पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत मिल पाएगी?
काव्यांश की मौत एक परिवार की अपूरणीय क्षति है। लेकिन इस हादसे से शहर की व्यवस्था के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है कि क्या किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार किए बिना खुले नालों और खतरनाक गड्ढों को सुरक्षित किया जाएगा?
रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा तभी सार्थक होगा, जब शहर के बच्चों को सुरक्षित बचपन मिल सके। वरना विकास के बड़े दावों के बीच खुले नाले और गड्ढे व्यवस्था की उन कमियों की याद दिलाते रहेंगे, जिन्हें समय रहते दूर किया जा सकता था।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

