ग्राउंड रिपोर्ट- सत्य राजपूत, रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बेन्द्री की 3D इनोवेशन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य कर्मचारी बाल-बाल बच गए। विस्फोट इतना भयावह था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए और राहत-बचाव दल को उनके अवशेष एकत्र करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिकों को उपलब्ध कराए जाने वाले सुविधाओं और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर स्थानीय लोगों और श्रमिकों में भारी नाराजगी है।
हादसे के वक्त फैक्ट्री में काम कर रहे थे दर्जनों मजदूर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय फैक्ट्री में अलग-अलग जिलों से आए मजदूर अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे। इनमें डिंडौरी, जांजगीर-चांपा सहित अन्य क्षेत्रों के श्रमिक शामिल थे। बताया जा रहा है कि कई मजदूर रोजाना 12-12 घंटे तक काम करते हैं।
घटना के समय धमाका इतना तेज था कि दूर खड़े मजदूर तो बच गए, लेकिन विस्फोट के करीब मौजूद कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विस्फोट के बाद का दृश्य बेहद भयावह था और मृतकों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप
जानकारी के मुताबिक, करीब 20 वर्षों से संचालित इस फैक्ट्री में श्रमिक सुरक्षा से जुड़े बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। उनका दावा है कि कई कर्मचारियों को ESI, PF, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था। साथ ही कार्यस्थल पर व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) जैसे हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स, सुरक्षा चश्मे और स्टील-टो जूते भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
“जो पास थे, उनकी पहचान करना मुश्किल था”

हादसे में बच निकले एक मजदूर ने भावुक होते हुए बताया कि वह विस्फोट स्थल से कुछ दूरी पर था, इसलिए उसकी जान बच गई। उसने कहा कि जो साथी धमाके के करीब थे, उनके शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे और बचाव दल को उनके अवशेष अलग-अलग स्थानों से एकत्र करने पड़े। उसने कहा कि यह दृश्य जीवनभर नहीं भूल पाएगा।
फायर सेफ्टी विभाग ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
फायर सेफ्टी कमांडेंट पुष्पराज सिंह ने कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण में कई आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं मिलीं। उनके अनुसार यह जांच का विषय है और विस्तृत रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि किसी भी फैक्ट्री में निम्न सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य मानी जाती हैं—
- व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) जैसे हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स, सुरक्षा चश्मा और स्टील-टो जूते।
- आपातकालीन निकासी द्वार, जो हमेशा खुले और अवरोध मुक्त हों।
- पर्याप्त अग्निशमन यंत्र और नियमित मॉक ड्रिल।
- मशीनों पर सुरक्षा गार्ड, नियमित मेंटेनेंस और खराब मशीनों की स्पष्ट पहचान।
- फर्स्ट एड किट, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी और कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था।
- सभी कर्मचारियों के लिए नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण।
“12 घंटे काम, 400 रुपये दिहाड़ी” का दावा
मौके पर मौजूद कुछ श्रमिकों ने दावा किया कि फैक्ट्री में आठ घंटे की बजाय 12-12 घंटे तक काम कराया जाता है। उनका कहना है कि एक शिफ्ट में लगभग 40 से 50 मजदूर कार्यरत रहते हैं और कई कर्मचारियों को करीब 400 रुपये प्रतिदिन नकद भुगतान किया जाता है। श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका ESI पंजीकरण नहीं कराया गया और न ही नियमित स्वास्थ्य जांच या मेडिकल कैंप आयोजित किए जाते थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
“यह हादसा नहीं, मजदूरों की हत्या”— स्थानीय जनप्रतिनिधि
घटना के बाद एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन ने शुरू की जांच
हादसे की सूचना मिलते ही DCP, ADCP (नॉर्थ), ACP, फायर ब्रिगेड, SDRF, SDM सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने फिलहाल तीन मजदूरों की मौत की पुष्टि की है।
कई सवाल अब भी बाकी
इस हादसे के बाद श्रमिकों और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था तो इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ? क्या संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया था? यदि पहले भी ऐसी घटनाएं हुई थीं तो आवश्यक सुधार क्यों नहीं किए गए? इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है।
औद्योगिक सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस
उरला की यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा, श्रम कानूनों के पालन और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर बहस का विषय बन गई है। यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और नियमित निरीक्षण हो, तो इस तरह के हादसों की आशंका काफी हद तक कम की जा सकती है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
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