अजय सैनी, भिवानी. मानसून की पहली ही झमाझम बारिश ने भिवानी नगर परिषद और संबंधित विभागों के उन तमाम दावों की हवा निकाल दी है, जो वे मॉनसून से निपटने के लिए महीनों से कर रहे थे। छोटी काशी के नाम से मशहूर भिवानी शहर की व्यवस्थाएं पहली ही बारिश में पूरी तरह चरमरा गईं। बुधवार को आई बारिश से शहर के मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी वार्डों की गलियां तक तालाब में तब्दील हो गईं। इस बदइंतजामी को लेकर जनता में भारी आक्रोश है।
इसी बीच समाजसेवी एवं पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने शहर के विभिन्न जलमग्न इलाकों का दौरा किया और प्रशासनिक उदासीनता पर तीखा रोष प्रकट किया। जलभराव की जमीनी हकीकत जानने के लिए समाजसेवी उमेश भारद्वाज ने आज शहर के प्रभावित क्षेत्रों, मुख्य बाजारों और कई वार्डों की तंग गलियों का सघन दौरा किया। स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उमेश भारद्वाज ने कहा कि नगर परिषद और संबंधित विभाग हर साल कागजों पर नालों की सफाई और करोड़ों के बजट का दावा करते हैं, लेकिन आज मानसून की पहली ही बारिश ने इस कागजी विकास की पोल खोलकर रख दी है। धरातल पर काम शून्य है। जब पहली ही बारिश में पूरा शहर घुटनों तक पानी में डूब गया, तो आने वाले दिनों में जब भारी बारिश होगी, तब भिवानी के हालात कितने भयावह होंगे, इसकी कल्पना करके ही डर लगता है। बारिश के बाद शहर के मुख्य रास्तों और बाजारों में नालों का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सडक़ों पर जमा हो गया।
जलभराव के कारण राहगीरों, दुकानदारों, वाहन चालकों और सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा झेलनी पड़ी। कई दुपहिया वाहन पानी के बीच बंद हो गए, जिससे लोगों को धक्का मारना पड़ा। दुकानदारों के शोरूम और दुकानों के आगे पानी जमा होने से उनका व्यापार ठप हो गया, जिससे स्थानीय व्यापारियों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा है। निरीक्षण के दौरान उमेश भारद्वाज ने कहा कि मानसून आने से पहले बड़े नालों और सीवरेज की गाद को साफ नहीं किया गया, जिसके कारण पानी की निकासी पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर साल केवल आपातकालीन पंप लगाकर पानी निकालने का ढोंग करता है, जबकि ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने का कोई स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया।
भारद्वाज ने कहा कि टैक्स देने के बावजूद भिवानी की जनता को जलभराव, गंदगी और टूटी सडक़ों जैसी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। नागरिकों को हर बार बारिश के मौसम में इस तरह नरकीय जीवन जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। भारद्वाज ने कहा कि जनता की इस तकलीफ को अधिकारियों के बंद कमरों तक ले जाया जाएगा और उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
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