० लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई दिग्गजों की मौजूदगी, 37 वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का होगा सम्मान
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के इतिहास में बुधवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पहली बार ‘विधायी गौरव यात्रा’ का भव्य आयोजन शुरू हुआ। इस विशेष कार्यक्रम में वर्तमान और पूर्व विधायकों का महासमागम आयोजित किया गया, जिसमें आजादी के बाद बने राज्य के 24 ऐतिहासिक कानूनों पर चर्चा की जा रही है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मौजूद रहे। वहीं समापन समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि होंगे। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान छह या उससे अधिक बार विधायक रहे 37 पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों, पूर्व विधानसभा अध्यक्षों और उपाध्यक्षों का सम्मान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री बोले- लोकतंत्र की गौरवशाली विरासत का प्रतीक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षों की यात्रा लोकतंत्र की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का आभार जताते हुए कहा कि पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का यह ऐतिहासिक अवसर लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग दौर में सभी दलों के नेताओं ने अपने विचारों, तर्कों और जनहित के मुद्दों के जरिए प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ओम बिरला ने विधानसभा की गौरवशाली परंपरा को सराहा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान विधानसभा ने देश को कई ऐसे जनप्रतिनिधि दिए हैं जिन्होंने सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर रहकर राष्ट्र का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि स्वयं 11 वर्षों तक इस सदन का सदस्य रहने के कारण उनकी कई यादें इस विधानसभा से जुड़ी हैं।
उन्होंने राजस्थान विधानसभा की 75 वर्ष की यात्रा को लोकतंत्र की गौरवशाली विरासत बताते हुए कहा कि यहां की संसदीय परंपराएं पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत रही हैं।
भैरों सिंह शेखावत को किया याद
अपने संबोधन में ओम बिरला ने पूर्व उपराष्ट्रपति एवं पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि विधायक, नेता प्रतिपक्ष, मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति के रूप में शेखावत ने देश की अनुकरणीय सेवा की। उनकी संसदीय समझ, संवाद शैली और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता आज भी सभी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा है।
भविष्य के लोकतंत्र पर भी हुआ मंथन
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह आयोजन केवल 75 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी संकल्प है। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव, औद्योगिक विकास और वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की जिम्मेदारी विधानसभा की है।
कार्यक्रम के दौरान आजादी के बाद राजस्थान में बने 24 महत्वपूर्ण कानूनों पर विचार-विमर्श के साथ विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी याद किया जा रहा है।

