Rajasthan Maternal Death: राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। जोधपुर के डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पतालों में दो महिलाओं की मौत के बाद डूंगरपुर जिला अस्पताल में भी एक प्रसूता ने दम तोड़ दिया।

इन तीन नई मौतों के साथ पिछले 15 दिनों में राज्य में प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की मौत का आंकड़ा बढ़कर 7 हो गया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मातृ चिकित्सा सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में (मई से जुलाई 2026 के बीच) पिछले 3 महीनों में कुल 23 प्रसूताओं की मौत दर्ज की गई है।

जोधपुर में दो महिलाओं की उपचार के दौरान मौत

डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा के अनुसार, फलोदी निवासी 32 वर्षीय कृष्णा कुमारी को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के कारण उम्मेद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के जरिए शिशु का जन्म होने के बाद गुरुवार सुबह अचानक उसे सांस लेने में तकलीफ हुई। डॉक्टरों ने तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेकर रेस्पिरेटरी आईसीयू में भर्ती किया और दो बार सीपीआर सहित सभी जरूरी प्रयास किए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। दूसरे मामले में नागौर निवासी सरोज को गर्भ में भ्रूण की मौत और अत्यधिक रक्तस्राव की गंभीर स्थिति में मथुरादास माथुर अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

दो मरीजों की हालत में सुधार

अस्पताल प्रशासन के अनुसार महात्मा गांधी अस्पताल की आईसीयू में भर्ती दो अन्य मरीजों की हालत पहले से बेहतर है। इनमें एक महिला का संक्रमण और किडनी संबंधी जटिलताओं का इलाज चल रहा है, जबकि जालोर की 18 सप्ताह की गर्भवती महिला का निमोनिया के कारण उपचार किया जा रहा है। वह फिलहाल बाइपैप सपोर्ट पर है और उसकी स्थिति में सुधार बताया गया है।

डूंगरपुर में मृत शिशु को जन्म देने के बाद प्रसूता की मौत

उधर, डूंगरपुर जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु विभाग में उदयपुर जिले के सुलई-खेरवाड़ा निवासी 19 वर्षीय ललिता मीणा ने बुधवार को मृत शिशु को जन्म दिया था। डिलीवरी के करीब 24 घंटे बाद गुरुवार सुबह उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब तीन घंटे तक अस्पताल में हंगामा किया और शव को मोर्चरी ले जाने से रोक दिया। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।

जांच के आदेश, डॉक्टर ने भी दी शिकायत

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रसूता का उपचार तय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया था। पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। वहीं, एक जूनियर डॉक्टर ने परिजनों पर धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस को लिखित शिकायत भी सौंपी है।

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