Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी अब उन पर भारी पड़ने वाली है। प्रदेश के करीब 678 सरकारी डॉक्टरों के करियर पर अब रजिस्ट्रेशन रद्द होने की तलवार लटक गई है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि जो डॉक्टर लंबे समय से ड्यूटी से नदारद हैं या ट्रांसफर के बाद नई जगह नहीं पहुंचे, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी है। डायरेक्टर हेल्थ डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5 मई तक का आखिरी अल्टीमेटम जारी कर दिया है।

PG के नाम पर गायब हुए डॉक्टर्स पर कसता शिकंजा
दरअसल, इस लिस्ट में सबसे बड़ी संख्या उन डॉक्टरों की है जो सरकारी सेवा के दौरान MBBS के बाद PG (Post Graduation) करने के लिए ब्रेक लेकर गए थे। नियम के मुताबिक, पढ़ाई पूरी होते ही इन्हें वापस सरकारी सेवा में रिपोर्ट करना था। विभाग ने इन्हें पोस्टिंग भी अलॉट कर दी, लेकिन इन डॉक्टर्स ने सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी ज्वॉइन करने के बजाय दूरी बना ली। अब विभाग इन पर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का मामला चलाने जा रहा है।
वसूली और रजिस्ट्रेशन कैंसल करने की तैयारी
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जो डॉक्टर्स पीजी पूरी करने के बाद भी वापस नहीं लौटे, उनसे अब बॉन्ड की भारी-भरकम राशि वसूली जाएगी। इसके लिए विभाग ‘पीडीआर एक्ट’ (PDR Act) के तहत कार्रवाई करने जा रहा है। डायरेक्टर हेल्थ ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर 5 मई की डेडलाइन तक ये डॉक्टर्स ड्यूटी पर नहीं लौटते, तो राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) को लिखकर उनका रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए निरस्त करवा दिया जाएगा। यानी डॉक्टर साहब फिर कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।
इन तीन कैटेगरी के डॉक्टर्स पर गिरेगी गाज
विभाग ने उन डॉक्टरों की भी लिस्ट तैयार कर ली है जो पिछले कई महीनों से ‘एपीओ’ (APO) चल रहे थे या जिनका हाल ही में ट्रांसफर किया गया था, लेकिन उन्होंने नई जगह पर कार्यभार नहीं संभाला। PG डॉक्टर्स जिन्होंने पढ़ाई के बाद सरकारी सेवा में वापसी नहीं की। ऐसे APO डॉक्टर्स जो पोस्टिंग मिलने के बाद भी गायब हैं। ट्रांसफर वाले डॉक्टर्स जिन्होंने रसूख के चलते नई जगह ज्वॉइनिंग नहीं दी।
5 मई है डेडलाइन
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बाद पूरे राजस्थान के मेडिकल महकमे में हड़कंप मच गया है। जयपुर मुख्यालय से लेकर जिला स्तर के सीएमएचओ (CMHO) कार्यालयों तक इन डॉक्टरों की सूची भेज दी गई है। विभाग का मानना है कि इन डॉक्टरों की लापरवाही से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अब देखना होगा कि 5 मई तक कितने डॉक्टर डर के मारे वापस लौटते हैं और कितनों का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द होता है।
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