Rajasthan News: राजस्थान कांग्रेस की राजनीति से इस वक्त एक बहुत ही दिलचस्प और बड़ी तस्वीर सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर गुरुवार को दौसा के जीरोता-भंडाना में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसे हर साल की तरह इस बार भी ‘प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाया गया।

लेकिन इस बार राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि सचिन पायलट के इस पारिवारिक कार्यक्रम में कांग्रेस के वो नेता भी एक साथ खड़े दिखे, जो कल तक एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते थे।
एक ही पंडाल में जुटे गहलोत और पायलट खेमे के धुरंधर
आम तौर पर राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आए दिन सुर्खियां बटोरती हैं। मगर भंडाना की इस सर्वधर्म प्रार्थना सभा ने पूरे प्रदेश के भाजपाइयों और राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है।
सचिन पायलट के बुलावे पर इस कार्यक्रम में अशोक गहलोत खेमे के बेहद करीबी माने जाने वाले कई विधायक, पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता एक मंच पर बैठे नजर आए। राजनीति के जानकार इसे प्रदेश कांग्रेस के भीतर बदल रहे समीकरणों और एक नई सियासी शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।
जयपुर से दौसा तक हलचल
इस खास मौके पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं की लिस्ट काफी लंबी है। मंच पर कांग्रेस की एकजुटता दिखाने के लिए कई बड़े चेहरे मौजूद थे। हेमाराम चौधरी, मुरारी मीणा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर और अनिल चोपड़ा जैसे कट्टर पायलट समर्थक तो वहां थे ही। इसके साथ ही गहलोत सरकार में कद्दावर मंत्री रहे बी.डी. कल्ला, रघु शर्मा, शकुंतला रावत, प्रताप सिंह खाचरियावास और अमीन कागजी जैसे दिग्गज भी विशेष रूप से शामिल हुए।
युवाओं और संगठन के चेहरों में धीरज गुर्जर, निर्मल चौधरी, अभिमन्यु पूनिया और कुलदीप इंदौरा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके अलावा संयम लोढ़ा, नरेंद्र बुढ़ानिया और लक्ष्मण मीणा सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए दर्जनों पूर्व विधायकों और जिला अध्यक्षों ने स्वर्गीय पायलट को नमन किया।
किसानों और युवाओं के मसीहा थे राजेश पायलट
सभा में जुटे सभी नेताओं ने गुटबाजी से ऊपर उठकर राजेश पायलट के राजनीतिक जीवन और उनके कड़े संघर्ष को याद किया। मंच से बोलते हुए नेताओं ने कहा कि राजेश पायलट ने देश की राजनीति में हमेशा गरीब, किसान और युवाओं की आवाज को बहुत ही बेबाकी से उठाया था। उनकी साफ-सुथरी और बेखौफ कार्यशैली आज भी हर कांग्रेसी कार्यकर्ता के लिए एक बड़ी सीख है।
हर साल भंडाना में होने वाले इस कार्यक्रम में इस बार जैसी भारी भीड़ और नेताओं की एकजुटता पहले कम ही देखने को मिली है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि राजस्थान कांग्रेस आगामी चुनौतियों से लड़ने के लिए अंदरूनी मतभेद भुलाकर एक जाजम पर आने की बड़ी तैयारी में है।
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