Rajasthan News: जयपुर के जगतपुरा इलाके में जेडीए का बुलडोजर चलने से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म हो गया है। नंदपुरी रोड पर ऑपरेशन 80 फीट को लेकर मुस्लिम समाज ने एक बड़ी बैठक की। इस मीटिंग में कांग्रेस के दो बड़े चेहरे विधायक रफीक खान और अमीन कागजी भी पहुंचे।

उन्होंने साफ कह दिया कि प्रशासन भले ही कुछ भी करे, लेकिन हम अपने हाथों से मस्जिद को शहीद करने का फैसला कभी नहीं ले सकते। मामला अब सीधे-सीधे आर-पार की लड़ाई में बदल चुका है।

मस्जिद को 40 की जगह 20 फीट कर दो

बैठक में मौजूद लोगों को समझाते हुए विधायक अमीन कागजी ने कहा कि हम हरगिज इसे खुद नहीं तोड़ेंगे। हमने अफसरों से मिन्नत की थी कि मस्जिद को पूरा तोड़ने के बजाय उसे 40 फीट से घटाकर 20 फीट कर दीजिए। इससे हमारी इबादत भी होती रहेगी और रास्ता भी निकल जाएगा। लेकिन जेडीए वाले हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने गुस्से में कहा कि मत मानने दीजिए, वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता, वक्त बदलेगा।

आजादी से पुरानी मजार और 1981 की मस्जिद

वहीं विधायक रफीक खान ने जेडीए की पैमाइश पर ही बड़े सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कागजात दिखाते हुए कहा कि जिस मजार को हटाने की बात हो रही है, वह तो देश की आजादी से भी ज्यादा पुरानी है। नूरानी मस्जिद को साल 1981 में लोगों ने अपनी जमापूंजी जोड़कर जमीन खरीदकर बनाया था।

विधायक ने प्रशासन को घेरते हुए कहा

जेडीए का मास्टर प्लान तो साल 2000 के बाद लागू हुआ है। इस जमीन की रजिस्ट्री 1981 की है। यही नहीं, 29 जून 1994 को जेडीए में इसका बकायदा डेवलपमेंट चार्ज भी जमा कराया गया था। अफसरों ने बिना जमीन पर आकर जांच किए, दफ्तर में बैठकर ही इस रोड को 80 फीट घोषित कर दिया।

नेताओं का कहना है कि वे इस मामले में डरने वाले नहीं हैं। इलाके में नमाज पढ़ने के लिए दूसरी कोई जगह नहीं है, इसलिए वे पीछे नहीं हटेंगे।

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