Rajasthan News: चित्तौड़गढ़ किले की फिजा में रविवार अलसुबह बुलडोजर की गड़गड़ाहट सुनाई दी। जब पूरा शहर गहरी नींद में था, ठीक 4 बजे प्रशासनिक अमला पूरे लाव-लश्कर के साथ दुर्ग के भीतर दाखिल हुआ। मामला पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध तरीके से बनाई जा रही एक दो-मंजिला इमारत का था।

10 जेसीबी और 8 ट्रैक्टर के साथ पहुंची टीम

प्रशासन ने इस अवैध निर्माण को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। 10 जेसीबी, 8 ट्रैक्टर और 3 ब्रेकर मशीनों को काम पर लगाया गया। सुरक्षा इतनी सख्त थी कि दुर्ग की तरफ जाने वाले हर रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी ताकि कोई विवाद न हो।

कलेक्टर का सख्त रुख, दर्ज हुआ केस

यह कार्रवाई जिला कलेक्टर डॉ. मंजू की सख्ती का नतीजा है। पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में उन्होंने साफ कह दिया था कि धरोहरों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। कलेक्टर के आदेश पर पुरातत्व विभाग ने शहर कोतवाली में नामजद केस भी दर्ज करवा दिया है। राजस्थान में पुरातत्व विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाने की यह अब तक की सबसे बड़ी और पहली ऐसी कार्रवाई है।

इन पर भी गिरेगी गाज

इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। सूत्रों के मुताबिक, चित्तौड़गढ़ दुर्ग के आसपास साल 2020 के बाद से लगभग 8 से 10 और रेस्टोरेंट और होटलों का अवैध निर्माण हुआ है। इन सभी की लिस्ट बनाकर दिल्ली स्थित आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को भेज दी गई है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, इन बाकी अवैध ठिकानों पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय है।

पुरातत्व विभाग के अधिकारी मनोज द्विवेदी ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा के लिए प्रशासन आगे भी इसी तरह का एक्शन लेता रहेगा।

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