Rajasthan News: राजस्थान के भीलवाड़ा शहर से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के कावाखेड़ा स्थित एक सरकारी स्कूल में सजा के नाम पर मासूम के साथ ऐसी बेरहमी की गई कि उसकी जान पर बन आई। सोमवार को क्लासरूम में एक महिला टीचर ने 8वीं के छात्र को ऐसी सजा दी कि बच्चा वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा। स्कूल परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर स्टाफ उसे आनन-फानन में निजी अस्पताल लेकर भागा।

पढ़ाई नहीं की तो दी खौफनाक सजा
मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के कावाखेड़ा राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल का है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्कूल में बीएड की इंटर्नशिप कर रही एक महिला टीचर ने 8वीं के छात्र को सिर्फ इसलिए टॉर्चर किया क्योंकि उसने पढ़ाई नहीं की थी। आरोप है कि टीचर ने बच्चे से एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 200 उठक-बैठक लगवाए। इस भीषण गर्मी और शरीर पर पड़ते बेतहाशा दबाव की वजह से बच्चा क्लास में ही निढाल होकर गिर गया।
मेरा बेटा मर जाता तो कौन जिम्मेदार होता?
अस्पताल से प्राथमिक इलाज के बाद जब बच्चे को छुट्टी मिली, तो उसकी मां उसे लेकर सीधे स्कूल पहुंच गई। स्कूल के गेट पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। बच्चे की मां का रो-रोकर बुरा हाल था, उन्होंने गुस्से में कहा, शनिवार को भी इसी मैडम ने मेरे बेटे से 100 उठक-बैठक लगवाई थीं। आज 200 लगवाईं। अगर उसे कुछ हो जाता या उसकी मौत हो जाती, तो क्या प्रशासन उसे वापस लाता? हंगामा बढ़ता देख आरोपी महिला टीचर मौका पाकर स्कूल से रफूचक्कर हो गई।
इस पूरे मामले में स्कूल के स्टाफ इंचार्ज प्रदीप मेहता का अजीबोगरीब बयान सामने आया है। उन्होंने 200 उठक-बैठक की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, बच्चे ने पढ़ाई नहीं की थी, तो मैडम ने थोड़े-बहुत उठक-बैठक लगवाए होंगे। हमने मैडम को डांट दिया है। घटना के बाद से कावाखेड़ा इलाके के लोगों में भारी रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सजा देने का यह तरीका किसी भी लिहाज से सही नहीं है। फिलहाल पुलिस को इस मामले की सूचना दे दी गई है।
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