Rajasthan News: जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात लगी आग में 8 मरीजों की मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्से में परिजन मुख्य सड़क पर धरने पर बैठ गए।
मृतक पिंटू गुर्जर के परिवार ने बताया कि वह पूरी तरह सामान्य था। डॉक्टरों ने कहा था कि दो दिन में छुट्टी मिल जाएगी। परिवार के मुताबिक, कुछ देर पहले तक बात हो रही थी, फिर अचानक उसकी मौत की खबर मिली।

भरतपुर की रुक्मणि के भाई दिलीप सिंह ने कहा कि यह प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। अगर समय पर सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो जानें नहीं जातीं। उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।
दिलीप सिंह ने बताया कि हादसे के वक्त रुक्मणि को बचाने के लिए उसका बेटा शेरू अंदर गया, लेकिन धुएं से हालत बिगड़ गई। अब वह अस्पताल में भर्ती है और उसकी स्थिति में सुधार है।
घटना स्थल पर तैनात गार्ड राम अवतार शर्मा ने बताया कि उन्हें रोज 230 रुपये मिलते हैं और फायर फाइटिंग सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि लोगों की मदद से 4-5 मरीजों को बाहर निकाला गया।
आग लगने के बाद एफएसएल की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। टीम यह पता लगा रही है कि शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ, आग सबसे पहले कहां लगी, और क्या फायर सिस्टम ठीक से काम कर रहा था। साथ ही यह भी जांच होगी कि क्या मरीजों को बचाया जा सकता था और उस वक्त वार्ड में कितने लोग मौजूद थे। टीम ने जले हुए उपकरणों के नमूने एकत्र किए हैं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि फायर उपकरण, केबल, स्विच, बिल्डिंग और बेड जैसी चीजों की एक तय समयसीमा होती है, जिसकी नियमित जांच जरूरी है। लेकिन सिस्टम तब तक नहीं जागता जब तक कोई बड़ी त्रासदी न हो जाए। उन्होंने इस घटना को सिस्टम द्वारा की गई हत्या बताया।
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