Rajasthan News: राजस्थान की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा को बड़ी राहत दी है। एसडीएम पर पिस्टल तानने के 20 साल पुराने मामले में सजा काट रहे पूर्व विधायक की स्थायी पैरोल वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने स्टेट पैरोल कमेटी को सिर्फ 7 दिन का वक्त दिया है।

2 महीने से अटका था फैसला

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि कमेटी को अब और देरी करने की इजाजत नहीं है। कंवरलाल मीणा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि उन्होंने दो महीने पहले पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन कमेटी ने उस पर कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने याचिका में सवाल उठाया था कि पैरोल नियमों में कोई समय सीमा तय न होने से अधिकारियों को मनमानी का मौका मिल जाता है, जो किसी भी कैदी की आजादी के हक के खिलाफ है।

क्या था वो 20 साल पुराना केस?

यह मामला कोई मामूली विवाद नहीं था, बल्कि एक सरकारी अधिकारी पर हथियार तानने का था। कोर्ट ने कंवरलाल मीणा को राजकार्य में बाधा डालने, सरकारी अधिकारी को धमकाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया था। बता दें कि निचली अदालत ने 3 साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली, जिसके बाद सजा बरकरार रही। पिछले साल 21 मई 2025 को उन्होंने झालावाड़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। कानूनी सजा मिलने के बाद विधानसभा स्पीकर ने उनकी सदस्यता भी रद्द कर दी थी।

जस्टिस की बेंच का आदेश

जस्टिस गणेश राम मीणा और जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की खंडपीठ ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कमेटी को निर्देशित किया है कि वह 7 दिनों के भीतर पूर्व विधायक के पैरोल आवेदन पर अंतिम फैसला ले। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या कमेटी पूर्व विधायक को पैरोल देगी या कानूनी पेंच फिर से आड़े आएंगे।

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