Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने गुलाबी नगरी की चरमराई सफाई व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति शुभा मेहता की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि शहर की सड़कों, आम रास्तों और नालियों से कचरा हटाने के लिए नगर निगम तत्काल ठोस कदम उठाए।

अधिवक्ता विमल चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वह निगम के कामकाज से बिल्कुल खुश नहीं है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम ने लगभग 8000 सफाई कर्मचारियों की भर्ती तो की है, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कम कर्मचारी नजर आते हैं। आरोप है कि भर्ती किए गए अधिकांश कर्मियों को या तो कार्यालयों में बाबू बना दिया गया है या वे सफाई के अलावा अन्य कार्यों में लगे हैं। इस पर कोर्ट ने निगम से वार्डवार कार्यरत सफाईकर्मियों का पूरा ब्योरा तलब किया है।
हर आवासीय कॉलोनी और बाजार से कचरा उठाने के लिए एक निश्चित टाइम-टेबल तय किया जाए, जिसकी जानकारी वहां के निवासियों और दुकानदारों को भी हो। आवासीय कॉलोनियों में बड़े आकार के कचरा पात्र (डंपिंग बॉक्स) लगाए जाएं और उन्हें रोजाना सुबह अनिवार्य रूप से साफ किया जाए। जो स्थानीय निवासी कचरा प्रबंधन को लेकर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, उन पर जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अगली सुनवाई 18 मार्च को
कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह उन कर्मचारियों की सूची भी पेश करे जिन्हें मूल कार्य (सफाई) के बजाय अन्य कार्यों में लगा दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय की गई है।
पढ़ें ये खबरें
- उफान पर महानदी, आवागमन ठप: CM साय के निर्देश पर प्रशासन मुस्तैद, शिवरीनारायण पहुंचे कलेक्टर-एसपी ने बैराज, पुल और प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण…
- दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती, कंस्ट्रक्शन पर रोक; पार्किंग शुल्क होगा दोगुना
- 24 साल की रक्षा ने MPPSC में रचा मुकाम, गणित में 31वीं मेरिट से बनीं सहायक प्राध्यापक
- TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर सुप्रीम कोर्ट ने EC को दी डेडलाइन, कहा- 4 महीने में फैसला लीजिए
- रोहतास: शादी के महज 4 महीने बाद नवविवाहिता की संदिग्ध मौत से सनसनी, इस बात को लेकर होता था विवाद


