Rajasthan News: राजस्थान के बारां जिले में वन विभाग ने अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एक ही दिन में 860 बीघा वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए 5500 मीटर पत्थर की दीवारों को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई जिला वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) अनिल कुमार यादव के नेतृत्व में केलवाड़ा, शाहाबाद, छबड़ा, छीपाबड़ौद, किशनगंज और अटरू के वन कर्मियों ने मिलकर पूरी की।

‘अतिक्रमण मुक्त बारां वनभूमि’ अभियान
वन विभाग ने ‘अतिक्रमण मुक्त बारां वनभूमि’ अभियान के तहत तीन जेसीबी मशीनों और केलवाड़ा, शाहाबाद, छबड़ा, छीपाबड़ौद, किशनगंज, अटरू रेंज के स्टाफ की सहायता से नाहरगढ़ रेंज के किशनपुरा नाके, सिगरी मौजा, लाटखेड़ा और कदीली में लगभग 750 बीघा वन भूमि पर अतिक्रमण हटाया। अतिक्रमियों ने वन भूमि पर खेती, बाड़े, फार्म हाउस और नलकूप तक बना रखे थे। कई जगह रास्तों को भी बंद कर दिया गया था। विभाग ने सख्ती से जेसीबी मशीनों के जरिए पत्थर की दीवारों को ध्वस्त कर भूमि को मुक्त कराया और ट्रेंच खोदकर अतिक्रमण को रोकने के उपाय किए। कदीली के पास खेरंका क्लोजर और बंजारा बस्ती के निकट भी अतिक्रमण हटाकर ट्रेंच खोदी गई। जलवाड़ा नाके पर भी पत्थर की दीवारें तोड़कर वन भूमि को मुक्त किया गया।
कार्रवाई के दौरान कदीली, लाटखेड़ा और किशनपुरा गांवों के लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन सतर्क जाप्ते ने किसी को कार्यवाही स्थल के पास नहीं आने दिया। सूत्रों के अनुसार, कुछ दबंग अतिक्रमियों ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर उच्च अधिकारियों पर दबाव बनाकर कार्रवाई रुकवाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दृढ़ता से कार्रवाई को अंजाम दिया। क्षेत्रीय वन अधिकारी हरिराम चौधरी ने बताया कि जब्त किए गए पत्थरों को निर्माणाधीन क्लोजर में उपयोग किया जाएगा।
मौके पर मौजूद अधिकारी और जाप्ता
कार्रवाई में डीएफओ अनिल कुमार यादव, क्षेत्रीय वन अधिकारी हरिराम चौधरी, छबड़ा के भरत राठौड़, शाहाबाद के राजेंद्र मेघवाल, केलवाड़ा के दीपक चौधरी के साथ किशनगंज, छबड़ा, छीपाबड़ौद, शाहाबाद, केलवाड़ा और नाहरगढ़ रेंज के 100 वन कर्मी, 15 महिला वनकर्मी और पुलिस जाप्ता मौजूद रहा।
बस्तियों और पीएम आवासों का अवैध निर्माण
नाहरगढ़ रेंज के किशनपुरा नाके पर तीन दशक पहले सघन जंगल था, लेकिन विभाग की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे वन भूमि पर बस्तियां बस गईं। लाटखेड़ा, बंजारा बस्ती और शाहपुरा बस्ती में अवैध खेती के लिए जंगल का विनाश किया गया। इन बस्तियों में दर्जनों प्रधानमंत्री आवासों का भी अवैध निर्माण हो गया।
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