Rajasthan News: भारत में नशे की खेप पहुंचाने के लिए ड्रग्स माफियाओं ने अब अपना पूरा गेम बदल दिया है। पहले पाकिस्तान बॉर्डर से नशे की तस्करी की खबरें आती थीं, लेकिन अब नया मणिपुर ड्रग कॉरिडोर सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गया है। म्यांमार से शुरू होकर ये नेटवर्क हजारों किलोमीटर का सफर तय कर सीधे राजस्थान पहुंच रहा है।

तस्करों ने बदल लिया अपना रास्ता

अफगानिस्तान में अफीम की खेती पर रोक लगने के बाद म्यांमार दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग्स हब बन गया है। यही कारण है कि अब तस्करों की नजर पूर्वोत्तर की तरफ है। म्यांमार, लाओस और थाईलैंड का वो इलाका जिसे गोल्डन ट्रायंगल कहा जाता है, वहां से निकलने वाला नशा मणिपुर के रास्ते भारत में घुस रहा है। ये नशा असम, बिहार और यूपी होते हुए राजस्थान तक आ पहुंचा है।

ट्रक के तहखाने में मौत का सामान

तस्कर अब ट्रकों को अपना सबसे बड़ा हथियार बना चुके हैं। ट्रक की स्टेपनी, गाड़ी की चेसिस और गुप्त तहखानों में नशे की खेप छुपाकर रखी जाती है। जोधपुर में जब भीनमाल के पास एक ट्रक की स्टेपनी से 41 किलो अफीम पकड़ी गई, तो जांच एजेंसियों के होश उड़ गए। ये खेप करीब 3 हजार किलोमीटर दूर मणिपुर से लाई गई थी।

इन जिलों पर है तस्करों की नजर

  • यूपी से आगरा-भरतपुर होते हुए पश्चिमी राजस्थान के जालोर, बाड़मेर, जोधपुर और पाली तक।
  • हरियाणा के रास्ते हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में एंट्री।

राजस्थान अब केवल ड्रग्स का आखिरी पड़ाव नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। एएनटीएफ (ANTF) के आईजी विकास कुमार के मुताबिक, अब सिर्फ अफीम ही नहीं, एमडी जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स भी इसी रास्ते से पहुंच रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं, क्योंकि ये नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा शातिर और फैला हुआ है।

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