Rajasthan News: रविवार रात बाबा रामदेव कॉलोनी की गलियां नीली वर्दी से चमक उठीं। घोड़ी पर सजा दूल्हा विक्रम मेघवाल जैसे ही दरवाजे पर आया, चारों तरफ़ पुलिस की राइफ़लें चमकने लगीं। बारात नहीं, सुरक्षा काफ़िला निकला था। डीपीएस बाइपास के रिसॉर्ट तक जो सात किलोमीटर का सफ़र था, वो पुलिस की जीपों के सायरन और वॉकी-टॉकी की आवाज़ों के बीच पूरा हुआ।

सब शुरू हुआ था दोपहर साढ़े बारह बजे। विक्रम का भाई नरेन्द्र राजीव गांधी नगर थाने में हाँफ़ता दाख़िल हुआ। कागज़ पर लिखा था, “आज भाई की शादी है, कुछ लोग घोड़ी चढ़ने नहीं देंगे। मारपीट हो सकती है।” थानाधिकारी सुरेश पोटलिया ने फोन उठाया, कमिश्नर ओमप्रकाश तक बात पहुँची। पंद्रह मिनट में एडीसीपी रोशन मीणा की अगुवाई में दो जीप, एक क्विक रिस्पॉन्स टीम और दस महिला सिपाहियों का दस्ता कॉलोनी में उतर गया।
शाम सात बजे दूल्हे का सेहरा बंधा। बाहर पुलिस ने तीन घेरे बनाए, पहला घोड़ी तक, दूसरा बारात के डीजे तक, तीसरा कॉलोनी की दोनों गलियों पर। कोई बाहरी शख़्स अंदर नहीं घुसा, कोई अंदर वाला बाहर नहीं निकला। दूल्हे की माँ ने जब घोड़ी को गुड़ खिलाया तो एक हेड कांस्टेबल ने सैल्यूट ठोंका। बच्चे तालियाँ पीटने लगे।
रात दस बजे बारात रिसॉर्ट पहुँची। दुल्हन के पिता ने दरवाज़े पर पुलिस वालों को मिठाई का डिब्बा थमाया। सबने एक साथ साँस छोड़ी। पर एक कांस्टेबल की ग़लती हो गई। उसने फेसबुक पर लिख दिया, “आज फिर वही पुराना झगड़ा।” सुबह तक पोस्ट वायरल, कांस्टेबल लाइन हाज़िर। थानाधिकारी ने कहा, “हमारी ड्यूटी सुरक्षा की थी, सोशल मीडिया की नहीं।”
आज सुबह कॉलोनी फिर शांत है। विक्रम की घोड़ी अब अस्तबल में सो रही है, और पुलिस की जीपें वापस थाने लौट गईं। बस एक बात सबकी ज़ुबान पर है, “शादी हो गई, इज्ज़त भी बच गई।”
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