Rajasthan News: राजस्थान सरकार, सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव के बीच, गाय को राज्यमाता का दर्जा देने पर विचार कर रही है। हाल ही में महाराष्ट्र ने गाय को राज्यमाता का दर्जा प्रदान किया था, और अब राजस्थान भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके लिए महाराष्ट्र के कानून का अध्ययन किया जा रहा है।
गोवंश की संख्या के मामले में राजस्थान का देश में छठा स्थान है, लेकिन गो-तस्करी की समस्याओं के कारण यहां कानून-व्यवस्था पर असर पड़ा है। इस कदम से गो-तस्करी पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू होंगे और गोवंश के परिवहन पर भी कई प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

16 अक्टूबर को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने यह पत्र पशुपालन एवं गोपालन विभाग के सचिव को कार्रवाई के लिए भेज दिया है, और इस बारे में देवासी को भी सूचित कर दिया गया है।
पाठ्यक्रम में होगा गोमाता का अध्याय
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 5वीं कक्षा के छात्र जल्द ही ‘गोमाता’ पर आधारित पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने संकेत दिए हैं कि इस पाठ में गाय के गोबर और मूत्र के उपयोग, दूध के स्वास्थ्य लाभ, और पर्यावरण के लिए गाय के महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाएगा, और संभवतः जल्द ही इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
गायों के लिए सम्मानजनक शब्द का निर्देश
मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक अधिसूचना जारी की गई है जिसमें गायों को आवारा कहने पर रोक लगा दी गई है और उनके लिए सम्मानजनक शब्दों के प्रयोग का निर्देश दिया गया है।
सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है सरकार: पशुपालन मंत्री
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि जैसे ऊंट को राज्य पशु घोषित करने के बाद उसके परिवहन और बलि पर प्रतिबंध लगा, वैसे ही गाय के लिए भी कई प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र से चर्चा के बाद तय किया जाएगा कि नया बिल लाया जाए या मौजूदा नियमों में संशोधन किया जाए। मंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।
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