Rajasthan News: राजस्थान के झालावाड़ जिले से भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है। यहां एक ग्राम पंचायत में मनरेगा के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए बड़ा खेल कर दिया गया। गंगधार इलाके की गुराड़िया झाला पंचायत के सरपंच पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपनी ही पंचायत के ग्राम सचिव के जाली दस्तखत कर दिए।

इस फर्जी दस्तखत के दम पर पांच अलग-अलग कामों के लिए सरकारी मस्टररोल जारी कर दी गई। मजे की बात यह है कि इस पूरे कांड की भनक ग्राम सचिव तक को नहीं थी। जब सच जानने के लिए अचानक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए।

अचानक जांच करने पहुंचे सचिव तो खुली पोल

यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब ग्राम सचिव रजत लोधा को कुछ गड़बड़ी की शिकायत मिली। वे बिना किसी को बताए सीधे उन जगहों पर पहुंच गए जहाँ मनरेगा का काम चल रहा था। सचिव ने साफ-साफ कहा कि उन्होंने सिर्फ 26 अप्रैल से 10 मई तक की मस्टररोल पर ही अपने दस्तखत किए थे। इसके बाद 11 मई से 25 मई तक के जो कागजात तैयार किए गए, उनके बारे में उन्हें कुछ पता ही नहीं था। मौके पर पहुंचते ही सरकारी फाइलों और जमीन की हकीकत का अंतर साफ दिखने लगा।

कागजों में हाजिरी पूरी, जमीन पर मजदूर गायब

जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने अफसरों को भी चकरा दिया। पंचायत के मियावाकी प्लांटेशन में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 78 मजदूर काम कर रहे थे। लेकिन जब मौके पर गिनती की गई, तो सिर्फ 48 मजदूर ही वहां मिले। मजदूरों के पास काम करने के लिए फावड़ा और गेती जैसे जरूरी औजार तक नहीं थे। वे बस वहां बैठे हुए थे।

इसी तरह पुराने स्कूल में नर्सरी विकास के काम में कागजों पर 18 मजदूरों की हाजिरी दर्ज थी। मौके पर सिर्फ 8 लोग मिले और काम पूरी तरह से बंद पड़ा था। सबसे बड़ा खेल तो सेमली छरोत की ग्रेवल सड़क निर्माण में देखने को मिला। रिकॉर्ड के हिसाब से वहां 18 मजदूर पसीना बहा रहे थे, लेकिन धरातल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं था। पूरी सड़क सूनी पड़ी थी।

पूरी पंचायत में मचा हड़कंप

ग्राम सचिव के इस खुलासे के बाद कि उनके नकली दस्तखत किए गए हैं, पूरे इलाके के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। इस घटना ने मनरेगा जैसी बड़ी सरकारी योजना में चल रही धांधली और अफसरों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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