Rajasthan News: जयपुर के सबसे बड़े एसएमएस (SMS) अस्पताल में शुक्रवार से चल रहा भारी बवाल आखिरकार शांत हो गया है। संविदा नर्सिंग कर्मी दीपक चरवाल की खुदकुशी के बाद अस्पताल छावनी बन गया था। गुस्साए कर्मचारी और परिजन शव को इमरजेंसी के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए थे। रातभर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और लंबी बातचीत के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा। पीड़ित परिवार की मांगें मान ली गई हैं।

नौकरी जाते ही खा लिया था जहर
दीपक चरवाल पिछले 4 साल से महिला चिकित्सालय में संविदा पर तैनात थे। 12 जून को अस्पताल प्रशासन ने अचानक एक फरमान जारी किया। इसके तहत 150 संविदा कर्मियों को नौकरी से हटा दिया गया। इसमें दीपक का नाम भी था। जेके लोन अस्पताल के भी 200 लोगों को नोटिस मिला था। अचानक नौकरी जाने के सदमे को दीपक बर्दाश्त नहीं कर पाए। उन्होंने जहर खाकर अपनी जान दे दी। इसके बाद साथी कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
इमरजेंसी के बाहर जुटी भारी भीड़
दीपक की मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों कर्मचारी एसएमएस मेडिकल कॉलेज परिसर में जमा हो गए। हालात बेकाबू होते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। माहौल तब और गरमा गया जब कुछ कर्मचारियों ने भी सुसाइड करने की धमकी दे डाली। इसके बाद मामले में नेताओं की एंट्री हुई। कांग्रेस नेता रफीक ख़ान, अमीन कागज़ी और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल तुरंत धरने पर बैठ गए।
इन 5 शर्तों पर खत्म हुआ धरना
मामला बढ़ता देख प्रशासन ने हाथ-पैर मारे और परिजनों को बातचीत के लिए बुलाया। सूत्रों के मुताबिक, बंद कमरे में हुई लंबी बैठक के बाद दीपक की पत्नी को मेडिकल कॉलेज में संविदा पर नौकरी दिए जाने पर सहमति बनी है। साथ ही सभी चंदा इकट्ठा करके परिवार को एक बड़ा आर्थिक पैकेज देंगे।
सांसद कोटे और पीएम आवास योजना से परिवार को रहने के लिए पक्का मकान मिलेगा। सांसद हनुमान बेनीवाल की आरएलपी पार्टी पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये कैश देगी। मृतक के बच्चों और परिवार को सरकार की पालनहार योजना का सीधा लाभ मिलेगा। समझौता होने के बाद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बातचीत सफल रही है और धरना खत्म कर दिया गया है।
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