Rajasthan News: बाल विवाह का दंश झेल रहे राजस्थान से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जोधपुर जिले में 4 महीने की उम्र में बाल विवाह का शिकार हुई अनीता को 20 साल बाद आखिरकार मुक्ति मिल गई। यह मामला इसलिए खास है क्योंकि राजस्थान की फैमिली कोर्ट ने पहली बार बालिका वधु को मुकदमेबाजी का खर्च दिलवाने का आदेश दिया है, जिससे यह एक ऐतिहासिक फैसला बन गया।

सोमवार को फैमिली कोर्ट के जज वरुण तलवार ने अनीता के बाल विवाह को रद्द करने का आदेश जारी किया। इस मामले में खास बात यह रही कि कोर्ट ने अनीता के पति को मुकदमे में आए खर्च को अनीता को लौटाने का निर्देश दिया। यह बाल विवाह के मामलों में पहली बार हुआ है कि किसी बालिका वधु को कानूनी लड़ाई का खर्च भी मिला हो।
15 साल की उम्र में ससुराल भेजने का दबाव
अनीता, जो एक किसान की बेटी है, महज 4 महीने की उम्र में बाल विवाह की बेड़ियों में बंध गई थी। जब वह 15 साल की हुई, तो उसके ससुराल वालों ने उसे ससुराल भेजने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। परिवार ने धमकियां भी दीं, लेकिन अनीता ने अपने भाई-बहनों के सहयोग से इसका विरोध किया। इसी दौरान उसकी मुलाकात कृति भारती से हुई, जो सार्थी ट्रस्ट की प्रबंध ट्रस्टी हैं। कृति ने न केवल अनीता का बाल विवाह रद्द करवाया, बल्कि उसे मुकदमे का खर्च दिलवाने में भी मदद की।
बाल विवाह खत्म करने की जरूरत पर जोर
कृति भारती ने कहा, यह फैसला सिर्फ अनीता के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो बाल विवाह का शिकार होती हैं। लड़का या लड़की दोनों को बाल विवाह रद्द करने का कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, बाल विवाह न सिर्फ सामाजिक बुराई है, बल्कि एक अपराध भी है। इसे खत्म करने के लिए समाज और कानून दोनों को मिलकर काम करना होगा।
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