Rajasthan News: कोटा के जेके लोन अस्पताल में रविवार की रात पिंकी महावर की मौत ने पूरे अस्पताल प्रशासन को एकबार फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिंकी को सीजेरियन (ऑपरेशन) के जरिए बेटी हुई थी, लेकिन उसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में उसे सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया, पर डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए।

बोतल चढ़ते ही हालत बिगड़ी
पिंकी के पति चंद्र प्रकाश महावर ने बताया कि पिंकी बिल्कुल ठीक थी। ऑपरेशन के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया और जैसे ही ड्रिप (बोतल) चढ़ानी शुरू की, पिंकी को परेशानी होने लगी। उसका यूरिन बंद हो गया और ब्लीडिंग शुरू हो गई। चंद्र प्रकाश का आरोप है कि उन्होंने बार-बार वहां मौजूद स्टाफ को गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। स्टाफ बस यही कहता रहा कि सब ठीक हो जाएगा। जब पिंकी की हालत ज्यादा खराब हुई, तब उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां वेंटिलेटर पर उसने दम तोड़ दिया।
अस्पताल की चुप्पी और बढ़ता गुस्सा
हैरानी की बात यह है कि कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ दिनों से यह सिलसिला जारी है, जिससे अब आम जनता में भारी डर बैठ गया है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
मुआवजे की मांग और अस्पताल के बाहर धरना
इस घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष राखी गौतम के नेतृत्व में कार्यकर्ता अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। पीड़ित परिवार की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को कड़ी सजा मिले और परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल भी तैनात है क्योंकि लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
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