Rajasthan News: झुंझुनूं के इस्लामपुर गांव का नाम बदलने की तैयारी ने तूल पकड़ लिया है। नाम बदलने के फैसले के विरोध में ग्रामीण और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट तक निकाली गई पैदल रैली ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अंबेडकर चौक से गूंजे नारे, पहचान नहीं बदलने देंगे
सोमवार की सुबह होते ही झुंझुनूं का इस्लामपुर गांव एक बड़े आंदोलन का गवाह बना। गांव के अंबेडकर चौक पर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हुए। हाथों में तख्तियां और जुबां पर एक ही नारा गांव की पहचान नहीं बदलने देंगे।
यह भीड़ समसपुर मार्ग से होते हुए जिला मुख्यालय की ओर पैदल ही निकल पड़ी। ग्रामीणों का गुस्सा साफ दिख रहा था। उनका कहना है कि दशकों पुरानी पहचान को कुछ लोगों के इशारे पर मिटाया नहीं जा सकता।
पूर्व मंत्री गुढ़ा ने भरी हुंकार
इस विरोध प्रदर्शन की कमान पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने संभाली। उनके साथ आरएलपी नेता राजेंद्र फौजी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी कदम से कदम मिलाकर चले।
कलेक्ट्री पहुंचकर गुढ़ा ने तल्ख तेवर दिखाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, अकेले की बात कोई नहीं सुनता। अगर किसी के साथ गलत हो रहा है, तो आपको सड़कों पर आना ही पड़ेगा और सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा।
आखिर नाम बदलने की बात कहां से आई?
दरअसल, झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू ने जिला कलेक्टर अरुण गर्ग को एक अनुशंसा पत्र लिखा था। इसमें इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने का सुझाव दिया गया।
प्रशासन ने जैसे ही इस प्रक्रिया पर काम शुरू किया, गांव में सुगबुगाहट शुरू हो गई। देखते ही देखते यह विरोध गांव की गलियों से निकलकर कलेक्ट्रेट की दहलीज तक पहुंच गया। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीणों ने नाम परिवर्तन की इस कवायद को तुरंत रोकने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन विधायक की सिफारिश मानता है या ग्रामीणों की नाराजगी के आगे झुकता है।
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