Rajasthan News: राजस्थान में पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर सियासत पूरी तरह गर्म हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया तो भजनलाल सरकार के मंत्री ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया। जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने गहलोत को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ कहा कि जब गहलोत खुद सत्ता में थे, तब उन्होंने जनता को राहत क्यों नहीं दी?

पड़ोसी राज्यों से महंगा है हमारे यहां तेल
इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक बयान से हुई। गहलोत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से राजस्थान सरकार की तिजोरी भर रही है। महंगा डीजल सीधे तौर पर हमारे अन्नदाता किसानों और गरीब वर्ग की कमर तोड़ रहा है।
गहलोत का कहना है कि जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो राज्य सरकार का वैट (VAT) अपने आप बढ़ जाता है। बीजेपी जब विपक्ष में थी तब वैट को लेकर खूब शोर मचाती थी, लेकिन आज गुजरात और हरियाणा के मुकाबले राजस्थान में सबसे ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है। सरकार को अपना मुनाफा छोड़कर तुरंत टैक्स कम करना चाहिए।
जोगाराम का पलटवार, जिनके घर कांच के होते हैं…
जोधपुर सर्किट हाउस पहुंचे कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने इस पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिनके घर कांच के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं मारा करते। गहलोत राज में विपक्ष ने कई बार वैट कम करने की मांग की थी, लेकिन तब मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने एक नहीं सुनी। मंत्री ने साफ किया कि तेल की कीमतें बढ़ना एक ग्लोबल समस्या है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री ने राज्य में तेल की सप्लाई को रुकने नहीं दिया।
गहलोत का आरोप है कि महंगा डीजल कृषि लागत बढ़ा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं। हरियाणा और गुजरात की तुलना में राजस्थान में वैट अधिक होने का भी दावा किया है। कांग्रेस ने वहीं मंत्री जोगाराम ने याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में मांग के बाद भी टैक्स नहीं घटा था। सरकार का कहना है कि वैश्विक संकट के बाद भी राज्य में तेल की कोई कमी नहीं है। अब देखना यह है कि जयपुर की गलियों से शुरू हुई यह सियासी जंग जनता को कोई राहत दिला पाती है या सिर्फ बयानों तक ही सिमट कर रह जाती है।
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