Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के बीच राजपूत करणी सेना की अपील ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने पंचायत और निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों को वोट नहीं देने की अपील की है।

उनका कहना है कि जो उम्मीदवार भाजपा या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में आएंगे, करणी सेना उनका समर्थन नहीं करेगी। संगठन ने उन निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही है, जो UGC बिल के विरोध में उसके साथ खड़े हैं।नामांकन वापसी के अंतिम दिन महिपाल सिंह मकराना अपने समर्थकों के साथ नागौर स्थित एसडीएम कार्यालय के बाहर पहुंचे और विरोध जताया। करणी सेना के साथ कुछ अन्य संगठनों की ओर से भी भाजपा और कांग्रेस के बहिष्कार का आह्वान किया गया है।
UGC बिल के विरोध में कई महीनों से आंदोलन का दावा
करणी सेना और कुछ सवर्ण संगठनों की ओर से केंद्र सरकार के UGC बिल का लगातार विरोध किया जा रहा है। संगठन इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
नागौर में प्रदर्शन के दौरान महिपाल सिंह मकराना ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार UGC बिल के जरिए सवर्ण समाज को अलग-अलग जातियों में बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे स्वीकार नहीं करने की बात कही।
मकराना ने दावा किया कि इस बिल के विरोध में करणी सेना पिछले सात-आठ महीने से आंदोलन कर रही है और इस दौरान देशभर में करीब 1100 किलोमीटर की यात्रा भी की गई है। उन्होंने कहा कि संगठन की लड़ाई अपने बच्चों के भविष्य को लेकर है और सरकार को यह बिल वापस लेना होगा।
BJP-कांग्रेस के टिकट वालों को वोट नहीं देंगे
महिपाल सिंह मकराना ने निकाय चुनाव को लेकर संगठन की रणनीति भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि भाजपा या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को वोट नहीं दिया जाएगा।
उनके मुताबिक, जो निर्दलीय उम्मीदवार UGC बिल के मुद्दे पर करणी सेना के साथ खड़े हैं, उन्हें समर्थन दिया जाएगा। मकराना ने कहा कि ऐसे ही उम्मीदवारों को मेयर, चेयरमैन और पार्षद बनाने की कोशिश की जाएगी।
इस अपील से निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के सामने एक नया राजनीतिक समीकरण खड़ा हो सकता है। खासकर उन वार्डों में इसका असर देखने को मिल सकता है, जहां निर्दलीय उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं।
चुनावी मैदान में कितना असर होगा?
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला कई जगहों पर है। ऐसे में किसी सामाजिक संगठन की ओर से दोनों प्रमुख दलों के बहिष्कार की अपील चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, इस अपील का वास्तविक असर मतदान के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल करणी सेना ने UGC बिल को चुनावी मुद्दा बनाते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
मकराना का संदेश है कि संगठन उन उम्मीदवारों के पक्ष में जाएगा, जो UGC बिल के विरोध में उसके साथ खड़े हैं। अब देखना होगा कि यह अपील निकाय चुनाव में कितने मतदाताओं तक पहुंचती है और निर्दलीय उम्मीदवारों को इसका कितना फायदा मिलता है।
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