Rajasthan Nikay Chunav 2026: अलवर जिले की कठूमर नगर पालिका में चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले प्रशासनिक कार्रवाई ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस की चेयरमैन प्रत्याशी सोरनदेई के पति और ग्राम पंचायत टोडा में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत राजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से निलंबित कर दिया गया है।

विकास अधिकारी पंचायत समिति कठूमर की ओर से जारी आदेश के मुताबिक राजीव कुमार 8 सितंबर से बिना पूर्व सूचना और प्रशासनिक अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित थे। कठूमर में चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है।

8 सितंबर से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे राजीव कुमार

निलंबन आदेश के अनुसार राजीव कुमार ग्राम पंचायत टोडा में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात हैं। वे 8 सितंबर से लगातार अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए। उन्होंने अवकाश के लिए आवेदन भी नहीं किया और न ही अधिकारियों को अनुपस्थिति की पूर्व सूचना दी। विभाग ने इसे सरकारी कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और सेवा नियमों का उल्लंघन माना। इसी आधार पर उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है।

निलंबन के दौरान अलवर रहेगा मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान राजीव कुमार का मुख्यालय जिला परिषद कार्यालय, अलवर निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा। बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के मामले में स्थानीय स्तर पर जांच भी शुरू कर दी गई है।

कठूमर चेयरमैन चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

कठूमर नगर पालिका में पहली बार चेयरमैन पद के लिए चुनाव हो रहा है। इस पद के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस ने वार्ड 16 की पार्षद सोरनदेई को चेयरमैन पद का उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने वार्ड 7 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाली मणि देवी को प्रत्याशी बनाया है। कठूमर नगर पालिका का चेयरमैन पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। चुनाव के लिए 21 सितंबर को मतदान होगा।

चुनाव से पहले निलंबन ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

राजीव कुमार का निलंबन ऐसे समय हुआ है, जब कठूमर में चेयरमैन चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। उनकी पत्नी सोरनदेई कांग्रेस की ओर से चेयरमैन पद की प्रत्याशी हैं। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि 8 सितंबर से राजीव कुमार के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का संबंध चुनावी गतिविधियों से हो सकता है। हालांकि, निलंबन आदेश में उनकी अनुपस्थिति का कारण केवल बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर रहना बताया गया है। राजनीतिक दबाव या चुनावी बाड़ाबंदी से जुड़ी किसी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब कठूमर में सबकी नजर 21 सितंबर को होने वाले चेयरमैन चुनाव पर है। प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाला यह मुकाबला स्थानीय राजनीति में खासा महत्वपूर्ण हो गया है।

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