Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार, 31 अगस्त को पूरी हो गई। इसके साथ ही 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में होने वाले चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। अब 1 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच, 3 सितंबर को नाम वापसी और 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटन होगा। इसके बाद हर वार्ड में मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

राज्य में इस बार 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाओं में चुनाव होना है। कुल 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में मतदान कराया जाएगा।

18 से 35 साल के करीब 58 लाख मतदाता

इन चुनावों में करीब 1.44 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें युवा मतदाताओं की संख्या भी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष की उम्र के 21,30,043 और 26 से 35 वर्ष के 36,60,211 मतदाता हैं।

इस तरह 18 से 35 वर्ष की उम्र के करीब 57.90 लाख मतदाता हैं। स्थानीय चुनाव में यह संख्या राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए महत्वपूर्ण है।

युवा वर्ग की भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि निकाय चुनाव में पार्षद बनने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है। 21 साल की उम्र पूरी कर चुका युवा अन्य कानूनी योग्यताएं पूरी करने पर पार्षद का चुनाव लड़ सकता है। ऐसे में इस बार युवा चेहरों और युवा वोटरों, दोनों पर राजनीतिक दलों की नजर है।

बीजेपी-कांग्रेस के सामने बागियों की चुनौती

नामांकन खत्म होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बागियों को रोकने की है। टिकट वितरण के दौरान कई वार्डों में दावेदारों के बीच खींचतान देखने को मिली। टिकट नहीं मिलने वाले कुछ दावेदारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत भी दिए हैं।

ऐसे में 3 सितंबर तक का समय दोनों प्रमुख दलों के लिए अहम रहेगा। इसी दिन नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है। पार्टियों की कोशिश होगी कि अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतरे दावेदारों को मनाया जाए।

जयपुर जैसे बड़े नगर निगमों में भी टिकट वितरण को लेकर अंतिम समय तक कवायद चली। बीजेपी और कांग्रेस ने कई जगह पूरी सूची सार्वजनिक करने के बजाय उम्मीदवारों को सीधे पार्टी सिंबल देने की रणनीति अपनाई। इसके पीछे टिकट को लेकर संभावित बगावत को नियंत्रित करने की कोशिश मानी जा रही है।

BAP और RLP समेत छोटे दलों की भूमिका

बीजेपी और कांग्रेस के बीच करीबी मुकाबले वाले वार्डों में छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। आरएलपी, भारत आदिवासी पार्टी, एआईएमआईएम, एसडीपीआई और आम आदमी पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

इन दलों की नजर खास तौर पर आदिवासी इलाकों, मुस्लिम बहुल शहरी क्षेत्रों और उन वार्डों पर है जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी माना जा रहा है।

3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

नगरीय निकाय चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आरक्षण प्रक्रिया के बाद 10,245 वार्डों में करीब 3,356 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं।

यह आरक्षण सामान्य वर्ग के साथ-साथ आरक्षित वर्गों में भी लागू है। ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं सीधे पार्षद पद के चुनाव मैदान में हैं। 309 निकायों के प्रमुख पदों के आरक्षण में भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। कुल 101 निकाय प्रमुख पद महिलाओं के लिए आरक्षित बताए गए हैं।

10 नगर निगमों में से छह महापौर पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर नगर निगमों में महापौर पद अनारक्षित है। यहां किसी भी वर्ग का पुरुष या महिला उम्मीदवार महापौर पद की दौड़ में शामिल हो सकता है।

इसी वजह से इन चार बड़े नगर निगमों के चुनाव पर खास नजर है।

अब इन तारीखों पर रहेगी नजर

  • 1 सितंबर: नामांकन पत्रों की जांच
  • 3 सितंबर: नाम वापसी की अंतिम तारीख
  • 4 सितंबर: चुनाव चिन्हों का आवंटन
  • 9 सितंबर: पहले चरण का मतदान
  • 11 सितंबर: दूसरे चरण का मतदान
  • 14 सितंबर: मतगणना
  • 21 सितंबर: महापौर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव
  • 22 सितंबर: उपाध्यक्ष, उपसभापति और उपाध्यक्ष का चुनाव

नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के साथ टिकट का संघर्ष अब अगले चरण में पहुंच गया है। 3 सितंबर तक तय होगा कि कौन उम्मीदवार मैदान से हटता है और कौन बागी के तौर पर चुनाव लड़ता है। 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद हर वार्ड में मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

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