Rajasthan OBC Report: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले OBC आयोग की रिपोर्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को कोर्ट से दो-दो बार फटकार लगी और अवमानना की कार्रवाई हुई, इसके बाद OBC आयोग की रिपोर्ट सामने आई। जूली ने सरकार से रिपोर्ट के आंकड़े सार्वजनिक करने और अलग-अलग वर्गों को दिए जाने वाले आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

OBC रिपोर्ट पर टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा

टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार की इस मामले में बड़ी फजीहत हुई है। उनके मुताबिक, कोर्ट में दो बार फटकार लगने और अवमानना की कार्रवाई के बाद सरकार चुनाव की दिशा में आगे बढ़ी। जूली ने कहा कि सवा साल तक OBC आयोग की रिपोर्ट नहीं आई, लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद रिपोर्ट तुरंत सामने आ गई। उन्होंने सरकार से रिपोर्ट को जनता के सामने रखने की मांग की।

बोले- जनता को बताएं रिपोर्ट में क्या है

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि OBC आयोग ने अपनी रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की हैं। उन्होंने पूछा कि किन-किन वर्गों को कितना आरक्षण दिया जा रहा है और इसकी वास्तविक स्थिति क्या है। जूली के मुताबिक, रिपोर्ट के आंकड़े सार्वजनिक होने से जनता को आरक्षण व्यवस्था की पूरी जानकारी मिल सकेगी।

गोल्डन कवर में सीएम को सौंपी गई थी रिपोर्ट

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने 5 अगस्त को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग अध्यक्ष और पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने मुख्यमंत्री आवास पर रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान आयोग के सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया मौजूद रहे। रिपोर्ट सौंपे जाने के दौरान मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी मौजूद थे।

309 निकायों में 60 अध्यक्ष पद OBC के लिए प्रस्तावित

रिपोर्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, OBC और अति पिछड़ा वर्ग यानी MBC के लिए अलग-अलग आरक्षण का प्रावधान नहीं है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में 60 अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित किए जाने का प्रस्ताव है। इसी अनुपात को आधार बनाकर पंचायती राज संस्थाओं में भी OBC आरक्षण लागू किए जाने की बात सामने आई है।

करीब 900 पन्नों की है रिपोर्ट

OBC आयोग की रिपोर्ट दो भागों में करीब 900 पन्नों की बताई जा रही है। इसमें करीब 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया और उनसे 19 सवाल पूछे गए। इनमें परिवार को मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल भी शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जाट जाति की आबादी सबसे अधिक है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी सबसे ज्यादा इसी जाति का रहा है। रिपोर्ट के दूसरे भाग में पंचायत और नगरीय निकायों के लिए वार्ड और पदवार OBC प्रतिनिधित्व की सिफारिश की गई है। वहीं सलूम्बर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में ट्राइबल की 100 फीसदी सीट रिजर्व रहने की बात कही गई है।

सीट आरक्षण के लिए शुरू होगी लॉटरी

7 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में पंचायत राज और स्थानीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराने का फैसला किया गया। इसके साथ ही SC, ST और OBC वर्गों की सीटों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में OBC आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण की प्रक्रिया आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में अहम भूमिका निभाएगी।

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