OBC Reservation: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ होने लगा है। लंबे इंतजार के बाद ओबीसी आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलेवार आरक्षण तय होगा और निकाय व पंचायत चुनावों के लिए आरक्षित सीटों की लॉटरी निकाली जाएगी। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस बार पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग को पिछले चुनाव की तुलना में भी कम राजनीतिक आरक्षण मिलने की संभावना है।

आयोग की रिपोर्ट के बाद शुरू होगी आरक्षण प्रक्रिया

राज्य सरकार अब ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन करेगी। इसके बाद जिलेवार आरक्षण तय किया जाएगा और ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों तथा नगरीय निकायों में विभिन्न पदों के लिए आरक्षित सीटों की लॉटरी निकाली जाएगी। इसी प्रक्रिया के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।

पंचायतें बढ़ीं, OBC आरक्षण घटने के आसार

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के समय राजस्थान में 9,894 ग्राम पंचायतें थीं। उस समय ओबीसी वर्ग को करीब 15 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण मिला था। वर्ष 2021 में ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 11,341 हो गई, लेकिन ओबीसी आरक्षण घटकर करीब 14 प्रतिशत रह गया। अब राज्य में 14,784 ग्राम पंचायतें हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार ओबीसी आरक्षण 13 प्रतिशत से कुछ अधिक रहने की संभावना है। जबकि विभिन्न संगठनों का कहना है कि नियमानुसार ओबीसी वर्ग को 21 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण मिलना चाहिए।

रिपोर्ट में OBC आबादी का आकलन

सूत्रों के मुताबिक, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में राज्य की कुल ओबीसी आबादी करीब 3.80 करोड़ बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक आबादी जाट समुदाय की है, जो लगभग 71.76 लाख है। दूसरे स्थान पर यादव समुदाय है, जिसकी आबादी 51 लाख से अधिक बताई गई है। तीसरे स्थान पर गुर्जर समुदाय का उल्लेख किया गया है। हालांकि, आयोग की पूरी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

डोटासरा ने सरकार पर लगाए आरोप

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर ओबीसी वर्ग को पूरा राजनीतिक आरक्षण नहीं देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उसकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है और संविधान व कानून के अनुरूप 21 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा।

OBC संगठनों ने भी उठाए सवाल

ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस ओबीसी विभाग के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेंद्र सेन ने भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोग की रिपोर्ट में ओबीसी आबादी करीब 45 प्रतिशत बताई गई है और कई सामाजिक संगठन इसे 55 प्रतिशत तक मानते हैं, तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अब क्या होगा सरकार का अगला कदम?

फिलहाल ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सरकार के पास है। आरक्षण निर्धारण और लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पंचायत और निकाय चुनाव में विभिन्न वर्गों को कितनी सीटों पर आरक्षण मिलेगा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के बाद ही माना जाएगा।

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