Rajasthan Panchayat Chunav: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव समय पर होंगे या फिर दिसंबर तक के लिए टल जाएंगे, इस पर आज तस्वीर पूरी तरह साफ होने वाली है। भजनलाल सरकार और चुनाव आयोग की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट आज यानी 22 मई को अपना बड़ा फैसला सुना सकता है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने 11 मई को पूरी बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सरकार ने क्यों मांगा दिसंबर तक का समय?
दरअसल, हाईकोर्ट ने पिछले साल नवंबर में साफ आदेश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और नगर पालिकाओं के चुनाव करा लिए जाएं। लेकिन सरकार ने कोर्ट में अर्जी लगाकर कहा कि इस तय समय में चुनाव कराना मुमकिन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे कई कारण गिनाए।
सरकार का कहना है कि मई-जून के महीने में राजस्थान में भयंकर लू चलती है। इसके ठीक बाद जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश होती है और गांवों में लोग खेती-किसानी में व्यस्त रहते हैं। साथ ही, चुनाव कराने के लिए करीब 3.4 लाख सरकारी कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो फिलहाल जुटाना मुश्किल है। महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने से आरक्षण तय करने और वार्डों के सीमांकन में भी देरी हुई है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी फटकार
बीते 11 मई को जब इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब हाईकोर्ट की बेंच ने सरकार के इन बहानों पर सख्त नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने सीधे लहजे में कहा था कि सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है, उन्हें तैयारी के लिए पहले ही पूरा समय दिया गया था।
जब सरकार की तरफ से गर्मी और बरसात का तर्क दिया गया, तो कोर्ट ने पूछा कि यह आदेश नगर निकायों के लिए था, तो फिर पंचायतों के चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए? कोर्ट ने कहा कि ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे देखने का विषय नहीं है। कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
विपक्ष का आरोप- जनता परेशान, काम ठप
दूसरी तरफ, कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए एक अवमानना याचिका भी लगा दी है, जिस पर 26 मई को सुनवाई होनी है।
संयम लोढ़ा का कहना है कि राजस्थान की जनता को उनके वोट के अधिकार से दूर रखा जा रहा है। चुनाव न होने से गांवों और शहरों में प्रशासक बैठे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास के सारे काम पूरी तरह ठप पड़े हैं और जनता बेहाल है।
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