लखनऊ. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर करारा तंज कसा है. उन्होंने कहा, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने हाल ही में एक तथाकथित ‘पीडीए ऑडिट’ जारी किया है. इसे देखकर मुझे हंसी भी आई और यूपी के उन लाखों युवाओं पर गर्व भी हुआ, जिन्होंने इनके काले दौर को नकार दिया है. अखिलेश जी आजकल ‘ऑडिट’ शब्द का बड़ा शौक पाले हुए हैं, शायद उन्हें लगता है कि अंग्रेजी का भारी-भरकम शब्द उछालने से उनके शासनकाल के काले कारनामे धुल जाएंगे. अगर सच में हिम्मत है, तो अपनी सरकार के 2012 से 2017 के कार्यकाल का ‘भर्ती और परिवारवाद ऑडिट’ जारी करके दिखाइए! 90 दिन में जातीय जनगणना? यह संवैधानिक अज्ञानता है या सफेद झूठ!
अखिलेश जी ने बड़े गाजे-बाजे के साथ ऐलान किया है कि 2027 में सत्ता में आते ही वे 90 दिनों के भीतर ‘जातीय जनगणना’ करा देंगे. अखिलेश जी, आप सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, कम से कम संविधान की बुनियादी समझ तो रखिए! जनता को गुमराह करने की इस क्रोनोलॉजी को समझिए. जब 2012 से 2017 तक आप उत्तर प्रदेश के निरंकुश मालिक थे और केंद्र में कांग्रेस की बैसाखी वाली यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे थे, तब आपको पिछड़ों और दलितों की गिनती याद क्यों नहीं आई? आज जब सत्ता हाथ से फिसल चुकी है, तो आप 90 दिन का झुनझुना लेकर युवाओं को ठगने निकले हैं.
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अखिलेश जी, लूट शब्द आपकी जुबान पर शोभा नहीं देता. आपके समय में यूपी लोक सेवा आयोग (UPPSC) किस तरह ‘जाति विशेष सेवा आयोग’ बन चुका था, यह पूरा प्रदेश जानता है. तत्कालीन अध्यक्ष के कार्यकाल में जिस तरह एक विशेष जाति और क्षेत्र के लोगों को नौकरियां बांटी गईं, उस पर देश की सर्वोच्च अदालत तक ने फटकार लगाई थी. आपके समय में नौकरियां मेरिट देखकर नहीं बल्कि ‘पर्ची और खर्ची’ (सिफारिश और रिश्वत) देखकर दी जाती थीं.
आज डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं. पुलिस भर्ती से लेकर शिक्षा विभाग तक, एक भी भर्ती में कोई उंगली नहीं उठा सकता. हर भर्ती में बाबा साहेब के दिए आरक्षण के नियमों का अक्षरशः पालन हो रहा है. आपके राज में जो नौकरियां थानों और नेताओं के घरों से तय होती थीं, आज वे गरीब, पिछड़े और दलित के घर तक पूरी पारदर्शिता से पहुंच रही हैं.
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NFS पर ज्ञान देने वाले जरा अपना इतिहास खंगालें अखिलेश जी ने ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ (NFS) और लेटरल एंट्री को लेकर घड़ियाली आंसू बहाए हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी पदों पर नियुक्तियां देश के सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और कड़े नियमों के तहत योग्यता के आधार पर होती हैं. हमारी सरकार ने हमेशा वंचितों के हितों की रक्षा की है. इसके उलट, आपके समय में जब योग्य उम्मीदवार चिल्लाते रह जाते थे, तब आप योग्यताओं को ताक पर रखकर अपने चहेतों को कुर्सियां बांटते थे.
69,000 शिक्षक भर्ती मामले का समाधान 90 दिन में करने का जो दावा आप कर रहे हैं, उसकी पेचीदगियां आपके ही समय की गलत नीतियों का नतीजा हैं. यह मामला फिलहाल अदालत (हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) के अधीन है. भाजपा सरकार ने हमेशा कोर्ट के सामने स्टैंड लिया है कि वह हर वर्ग के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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सपा का पी.डी. ए.= परिवार (Family), दल (Party) और एक विशेष वोटबैंक. भाजपा का पी.डी. ए.= समाज के अंतिम पायदान पर बैठा वो गरीब, जिसे बिना किसी भेदभाव के मकान, राशन और सम्मान मिला. उत्तर प्रदेश गवाह है कि पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और मुफ्त राशन के सबसे बड़े लाभार्थी यही पिछड़े, दलित और वंचित वर्ग के लोग हैं. हमने गैर-यादव ओबीसी (मौर्य, शाक्य, सैनी, राजभर, निषाद, चौहान, कुर्मी) और गैर-जाटव दलितों को केवल वोटबैंक नहीं माना बल्कि उन्हें सरकार से लेकर संगठन में शीर्ष हिस्सेदारी दी है.
अखिलेश जी, आप अपनी इस तथाकथित ‘आरक्षण घोटाला पुस्तक’ को सूबे के हर गांव और घर तक ले जाइए, हमें कोई आपत्ति नहीं है. बल्कि हम तो चाहते हैं कि आप गांव-गांव जाएं. जब आप वहां जाएंगे, तो वही पिछड़े और दलित युवा आपसे पूछेंगे कि ‘2012-17 के बीच जब हमारे हक की नौकरियां सैफई भेजी जा रही थीं, तब आपका यह ऑडिट कहां सोया हुआ था?’ उत्तर प्रदेश अब जातिवाद, तुष्टिकरण और दंगों के काले दौर से बहुत आगे निकल चुका है. यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है, जो सुशासन और विकास की भाषा समझता है, आपके इस खोखले पाखंड को नहीं.

