Rajasthan Police Special Cell: राजस्थान में सरकारी योजनाओं में घपले और फर्जीवाड़े पर कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर विशेष सेल बनाने की तैयारी चल रही है। यह सेल सरकारी योजनाओं में सेंधमारी कर राशि का गबन करने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनुचित लाभ लेने वाले मामलों की जांच करेगी। पुलिस मुख्यालय में इसको लेकर मंथन चल रहा है और आगामी दिनों में विशेष सेल का गठन किया जा सकता है।

पेपर लीक की तर्ज पर सरकारी योजनाओं के लिए बनेगी सेल
भाजपा सरकार बनने के बाद पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई के लिए एसओजी में स्पेशल सेल बनाई गई थी। इस सेल ने 31 महीने में पेपर लीक से लेकर फर्जी डिग्री तक के मामलों का नेटवर्क उजागर किया।
इसी कार्रवाई के आधार पर डीजीपी ने सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ भी विशेष सेल बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित सेल सीधे उन मामलों की जांच करेगी, जिनमें सरकारी योजनाओं की राशि में गड़बड़ी या फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाभ लेने की शिकायत सामने आएगी।
झालावाड़ में खुला घपला, तब पुलिस मुख्यालय का ध्यान गया
सरकारी योजनाओं में हो रहे फर्जीवाड़े का मामला सबसे पहले झालावाड़ पुलिस ने उजागर किया था। जांच में सामने आया कि किसान सम्मान निधि सहित केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की राशि गलत लोगों के खातों में पहुंच रही थी।
झालावाड़ के एक किसान के नाम से मिलने वाली सम्मान निधि की राशि केरल में एक फर्जी व्यक्ति द्वारा उठाए जाने का मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने ऐसे मामलों की मॉनिटरिंग शुरू की। इसमें पता चला कि कई सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का गलत लोग लाभ उठा रहे हैं।
RGHS में भी सामने आया फर्जीवाड़ा
हाल ही में सीकर में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS में भी घपला सामने आया था। इसमें एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग इलाज के नाम से भुगतान उठा लिया गया। मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। गलत तरीके से बिल लगाने के मामले सामने आने के बाद कई अस्पतालों की RGHS की अनुमति भी खत्म कर दी गई थी। ऐसे मामलों ने सरकारी योजनाओं में होने वाले फर्जीवाड़े की निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने रखा है।
कोचिंग संस्थानों का डिजिटल डेटा बैंक बनाएगी पुलिस
पेपर लीक जैसी घटनाओं पर शिकंजा कसने और माफियाओं पर निगरानी के लिए राजस्थान पुलिस प्रदेश में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का डिजिटल डेटा बैंक भी तैयार करेगी। एसओजी ने इसके लिए सभी जिलों से जानकारी मांगी है। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर उनके क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग संस्थानों की सूची मांगी है।
इस डेटा में संस्थान का नाम, संचालक, फैकल्टी, संचालित कोर्स और विद्यार्थियों की संख्या जैसी जानकारी शामिल होगी। जिलों से सूचना मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। इसकी मॉनिटरिंग पुलिस मुख्यालय और एसओजी करेगी।
3.5 लाख बच्चे लेते हैं कोचिंग
राजस्थान में करीब 3.5 लाख बच्चे कोचिंग कर रहे हैं। सीकर, कोटा और जयपुर में कोचिंग लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है। पुलिस कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति पर भी नजर रखने की योजना बना रही है। तनाव या अवसाद की स्थिति में विद्यार्थियों की काउंसलिंग और उन्हें प्रेरित करने के लिए टीमें भेजी जाएंगी।
जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, उनकी सीधे पुलिस मुख्यालय से निगरानी की जाएगी। कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलों में हेल्पलाइन की जानकारी भी चस्पा कराई जाएगी। डीजीपी राजीव शर्मा के अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने और माफियाओं पर निगरानी के लिए कोचिंग संस्थानों का डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति पर निगरानी रखने में भी मदद मिलेगी।
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