Rajasthan Politics: राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई एक बार फिर सड़क पर आ गई है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से लेकर जयपुर के गलियारों तक सिर्फ एक ही चर्चा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अचानक दिल्ली में मीडिया को बुलाकर सचिन पायलट पर बड़ा हमला बोल दिया। गहलोत ने साल 2022 की उस मशहूर बगावत की यादें ताजा कर दी हैं, जब उन्हें दिल्ली भेजकर कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी चल रही थी।

गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है जब वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल खत्म होने वाला है। चर्चा है कि राहुल गांधी जल्द ही राजस्थान में संगठन की कमान सचिन पायलट को सौंप सकते हैं। ठीक इसी बीच गहलोत ने पुराना जख्म कुरेदकर दिल्ली दरबार को 2020 की याद दिला दी।
हाईकमान से बगावत नहीं थी, वो गुस्सा पायलट के खिलाफ था
अशोक गहलोत ने साफ कहा कि 25 सितंबर 2022 को जयपुर में जो कुछ हुआ, वो दिल्ली के बड़े नेताओं के खिलाफ कोई बगावत नहीं थी। वह पूरा गुस्सा असल में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ था। गहलोत के मुताबिक, उस समय करीब 100 विधायक एक साथ खड़े हो गए थे। विधायकों का कहना था कि हमारी जगह किसी को भी मुख्यमंत्री बना दो, लेकिन उस चेहरे को बर्दाश्त नहीं करेंगे जिसने मानेसर जाकर अपनी ही सरकार गिराने की साजिश रची थी। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि अगर मैंने खुद हाईकमान से बगावत की होती, तो क्या मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बचा रहता?
पायलट छोटे थे तब से जानता हूं, उन्हें सलाह कौन देता है पता नहीं
गहलोत यहीं नहीं रुके, उन्होंने पायलट के साथ अपने पुराने पारिवारिक रिश्तों का भी वास्ता दिया। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट को यह बात समझनी चाहिए, हम उनके दुश्मन नहीं हैं। जब हम सांसद थे, तब सचिन पायलट और मेरा बेटा वैभव दो-तीन साल के बच्चे थे। । आज राजनीति में उन्हें कौन पट्टी पढ़ा रहा है, यह मेरी समझ से बाहर है। गहलोत ने आगे कहा कि जब पायलट को केंद्र में मंत्री बनना था, तब उन्होंने मुझसे मदद मांगी थी और मैंने पैरवी भी की। लेकिन पायलट ने कभी किसी के सामने यह नहीं माना कि गहलोत ने उनकी मदद की थी।
पुष्कर की सीक्रेट मीटिंग और डोटासरा की कुर्सी पर नजर
इस पूरे विवाद की टाइमिंग को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लग रहे हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते ही पुष्कर में कांग्रेस का एक बड़ा शिविर हुआ था। आखिरी दिन राहुल गांधी खुद वहां कार्यकर्ताओं को जोश भरने पहुंचे थे। लेकिन पूरे कार्यक्रम के दौरान अशोक गहलोत नदारद रहे। सूत्रों की मानें तो गहलोत सिर्फ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी से मिले और खराब तबीयत का बहाना बनाकर जयपुर लौट आए।
चर्चा है कि इस शिविर के बाद राहुल गांधी राजस्थान में बड़ा फेरबदल करना चाहते हैं। डोटासरा की जगह सचिन पायलट को आगे लाने की खबरें जैसे ही सोशल मीडिया पर तैरने लगीं, गहलोत ने दिल्ली में बैठकर यह बड़ा बयान दाग दिया।
पायलट खेमे ने साधी चुप्पी
फिलहाल सचिन पायलट की तरफ से इस बयान पर कोई सीधा जवाब नहीं आया है। वे शांत हैं। लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि पायलट को किसी तरह की सफाई देने की जरूरत नहीं है। 2022 का पूरा नाटक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन के सामने हुआ था, जो खुद हाईकमान के आदेश पर जयपुर आए थे। पायलट समर्थकों का तर्क है कि हालिया लोकसभा चुनाव में राजस्थान से कांग्रेस के जो 11 सांसद जीते हैं, उनमें से 6 सांसद पायलट खेमे के माने जाते हैं। साफ है कि सूबे में जनता किसके साथ है, यह हाईकमान को अच्छे से पता है।
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