Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिससे जयपुर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के अंदर खलबली मच गई है। गहलोत ने करीब चार साल पुराने और दो साल पुराने बगावत के मुद्दों को दोबारा हवा दे दी है। उन्होंने सीधे तौर पर सचिन पायलट को निशाने पर लिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल खत्म होने वाला है। दिल्ली में बैठे बड़े नेता संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। ठीक इसी मौके पर गहलोत खेमे ने गहलोत बनाम पायलट की पुरानी लड़ाई को फिर से हवा दे दी है।
25 सितंबर 2022 को आखिर क्या हुआ था?
गहलोत ने दावा किया है कि साल 2022 में जो बगावत हुई थी, वो दिल्ली के बड़े नेताओं के खिलाफ नहीं थी। उनके मुताबिक विधायक बस यह नहीं चाहते थे कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए। याद दिला दें कि उस समय गहलोत को दिल्ली भेजकर कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी थी।
जयपुर में विधायकों की बैठक होनी थी। मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन पर्ची लेकर जयपुर पहुंचे थे। लेकिन 100 से ज्यादा विधायकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया था। अब गहलोत कह रहे हैं कि वह हाईकमान के खिलाफ विद्रोह नहीं था।
पायलट खेमे का पलटवार, गहलोत खुद पीछे हटे
गहलोत के इस बयान के बाद पायलट खेमा भी शांत नहीं बैठा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पायलट समर्थकों ने इसे केवल शब्दों का खेल बताया है। उनका कहना है कि गांधी परिवार खुद चाहता था कि गहलोत अध्यक्ष बनें। यह सब गहलोत की मर्जी से हो रहा था।
पायलट खेमे का कहना है कि जब बात हाथ से निकलने लगी तो गहलोत खुद अपने वादे से पीछे हट गए। अगर गहलोत इसे कोई साजिश कहते हैं, तो उन्हें खुलकर नाम लेना चाहिए कि आखिर वो साजिश रच कौन रहा था?
मानेसर जाना पार्टी के खिलाफ नहीं था
गहलोत ने साल 2020 के मानेसर कांड का भी जिक्र किया, जब पायलट अपने विधायकों के साथ हरियाणा चले गए थे। इस पर पायलट समर्थकों ने तीखा जवाब दिया है। उनका कहना है कि अगर 2022 की घटना पायलट के खिलाफ थी, तो 2020 में मानेसर जाना भी पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि गहलोत की काम करने के तरीके के खिलाफ एक गुस्सा था।
पायलट समर्थकों ने दावा किया है कि साल 2023 के चुनाव के बाद हाईकमान ने पायलट के साथ पूरा न्याय किया। पायलट के 5 करीबियों को सरकार में मंत्री बनाया गया था। राजस्थान में कांग्रेस के जो 11 सांसद जीतकर आए हैं, उनमें से 6 पायलट के बेहद खास हैं।
सूत्रों का कहना है कि पायलट ने अपना पूरा राजनीतिक भविष्य हाईकमान के फैसले पर छोड़ दिया है। लेकिन गहलोत का इस तरह पुराने घावों को फिर से खुरचना यह साफ बताता है कि राजस्थान कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी अभी खत्म नहीं हुई है। यह लड़ाई आगे और बढ़ेगी।
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