Rajasthan Politics News: राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर एमओए (MoA) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है। सरकार का दावा है कि इस समझौते से शेखावाटी के करीब 75 लाख लोगों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

हालांकि, इस समझौते की चर्चा केवल पानी तक सीमित नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे शेखावाटी के बदलते चुनावी समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह परियोजना आने वाले चुनावों में राजनीतिक तस्वीर भी बदल सकती है?

तीन दशक तक फाइलों में अटकी रही परियोजना

सीकर, झुंझुनूं और चूरू को मिलाकर बनने वाला शेखावाटी क्षेत्र लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या से जूझता रहा है। लगातार गिरते भूजल स्तर, टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता और हर चुनाव में यमुना के पानी का मुद्दा यहां की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है।

करीब तीन दशक तक यह परियोजना बैठकों और सरकारी फाइलों तक सीमित रही। अब दोनों राज्यों के बीच एमओए पर हस्ताक्षर होने के बाद उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी योजना अब अमल की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

शेखावाटी का चुनावी महत्व क्यों है?

राजनीतिक दृष्टि से शेखावाटी राजस्थान का बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।

सीकर: 8 विधानसभा सीटें
झुंझुनूं: 7 विधानसभा सीटें
चूरू: 6 विधानसभा सीटें

राजस्थान की कुल 21 विधानसभा सीटें और 3 लोकसभा सीटें इसी क्षेत्र से आती हैं। इसलिए यहां का जनादेश अक्सर प्रदेश की राजनीति पर असर डालता है।

चुनावी नतीजे क्या कहते हैं?

2023 के विधानसभा चुनाव में जहां पूरे राजस्थान में बीजेपी ने सरकार बनाई, वहीं शेखावाटी का जनादेश अलग रहा।

  • कांग्रेस: 11 विधानसभा सीटें
  • बीजेपी: 8 विधानसभा सीटें
  • अन्य: 2 सीटें

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बढ़त मिली। तीन लोकसभा सीटों में दो सीटें कांग्रेस और एक सीट बीजेपी के खाते में गई।

अब राजनीति किस दिशा में जाएगी?

यमुना जल परियोजना पर हुए इस समझौते को बीजेपी अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस भी इस परियोजना के लंबे संघर्ष और अपने योगदान का दावा कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह मुद्दा विकास के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन सकता है।

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