भागलपुर। ​कोलकाता से वाराणसी की ऐतिहासिक यात्रा पर निकला ‘राजमहल गंगा क्रूज’ इन दिनों बिहार के भागलपुर में पिछले छह दिनों से रुका हुआ है। गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने और बाढ़ जैसे हालात के कारण क्रूज की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। यह क्रूज 5 सितंबर को विक्रमशिला सेतु को पार कर भागलपुर पहुंचा था और 6 सितंबर से यहीं लंगर डाले खड़ा है। बेगूसराय के सिमरिया पुल के पास पानी का स्तर बढ़ने के कारण क्रूज के गुजरने के लिए सुरक्षित ऊंचाई नहीं बची है, जिसके चलते इसे आगे ले जाना खतरनाक साबित हो सकता था।

​पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया पटना

​जब यह यात्रा शुरू हुई थी, तब इस क्रूज पर कुल 9 पर्यटक और 31 चालक दल (क्रू) के सदस्य सवार थे। इन सैलानियों में दो भारतीय नागरिकों के अलावा न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और नीदरलैंड के विदेशी पर्यटक भी शामिल थे। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाया। सभी 9 पर्यटकों को भागलपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से सुरक्षित पटना भेजा गया। पटना में उनके ठहरने की खास व्यवस्था की गई है और वहीं से उन्हें सड़क मार्ग के जरिए आगे के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। क्रूज के प्रतिनिधि रंजीत के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए ही 6 सितंबर को इसे भागलपुर में ही रोकने का निर्णय लिया गया था। वर्तमान में क्रूज पर 29 क्रू मेंबर मौजूद हैं, जबकि दो सदस्य अपने घर गए हुए हैं।

​SDRF की कड़ी निगरानी और सुरक्षा

​क्रूज और उस पर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) पूरी तरह मुस्तैद है। भागलपुर के एसडीआरएफ टीम कमांडर इंस्पेक्टर कुमार नीलू ने जानकारी दी है कि सिमरिया में जलस्तर अधिक होने के कारण ही यह एहतियाती कदम उठाया गया है। राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में डेढ़ से दो फीट की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नाथनगर और गोसाईंदासपुर क्षेत्र में एसडीआरएफ की टीम लगातार गश्त कर रही है और दिन में दो-तीन बार क्रूज के पास जाकर हालात का जायजा ले रही है। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय लोगों और नाविकों को क्रूज के आसपास जाने से सख्त मनाही है।

​दो से तीन दिनों में मिल सकती है यात्रा के लिए हरी झंडी

​यह क्रूज पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों को जोड़ने वाले जलमार्ग पर संचालित होता है, लेकिन इस बार गंगा का अप्रत्याशित उफान इसकी राह में बड़ी बाधा बन गया है। जलस्तर में लगातार आ रही कमी को देखते हुए प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि अगले दो से तीन दिनों में मौसम और नदी की स्थिति पूरी तरह अनुकूल हो जाएगी। परिस्थितियां सामान्य होते ही राजमहल गंगा क्रूज एक बार फिर अपनी अधूरी यात्रा पूरी करते हुए वाराणसी की ओर प्रस्थान करेगा।