राजनांदगांव। राजनांदगांव के शासकीय मातृ शिशु अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

परिजनों के अनुसार, गर्भवती महिला को देर रात करीब 2:45 बजे प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने मेडिकल जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करने को कहा और सुबह करीब 10 बजे रिपोर्ट लाने की बात कही।

‘ऑपरेशन की मांग करते रहे, लेकिन नहीं सुनी गई’

परिजनों का कहना है कि महिला को लगातार तेज प्रसव पीड़ा हो रही थी। उन्होंने कई बार डॉक्टरों और स्टाफ से अनुरोध किया कि यदि सामान्य प्रसव संभव नहीं है तो तत्काल सिजेरियन (सी-सेक्शन) ऑपरेशन किया जाए। हालांकि, उनका आरोप है कि प्रसूति कक्ष के कर्मचारियों ने यह कहते हुए ऑपरेशन नहीं किया कि पूरी मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

परिजनों का दावा है कि समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण नवजात बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी।

‘बिना जानकारी दिए बच्ची को ले गए’

परिवार का आरोप है कि बच्ची के जन्म के बाद डॉक्टर नवजात को अपने साथ ले गए, लेकिन उसकी स्थिति के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि करीब आधे घंटे तक कोई डॉक्टर या अस्पताल का जिम्मेदार अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया। बाद में उन्हें केवल कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया और नवजात का शव सौंप दिया गया।

अस्पताल परिसर में हंगामा, जांच की मांग

नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

फिलहाल, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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