कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा महिला कांस्टेबल भर्ती में धांधली का आरोप लगाया है। कट-ऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद अभ्यर्थियों को बाहर करने पर उन्होंने सरकार को घेरा।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में महिला कांस्टेबल (GD) भर्ती को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Randeep Singh Surjewala ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “बिना पर्ची, बिना खर्ची का एक और फर्जीवाड़ा” करार दिया है। सुरजेवाला ने दावा किया कि कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जिससे युवाओं में भारी नाराजगी है।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल (GD) भर्ती में आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। उनके अनुसार, याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों के अंक सामान्य वर्ग (General Category) की निर्धारित कट-ऑफ से भी अधिक थे, इसके बावजूद उन्हें शारीरिक माप परीक्षण (PMT) के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया। कांग्रेस नेता ने इसे “मेरिट का कत्ल” बताते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पीएमटी के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने का तरीका मनमाना, अवैध और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है। सुरजेवाला ने कहा कि आयोग के कथित “अंधेर नगरी सिस्टम” के कारण योग्य अभ्यर्थियों को भी न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि मामले में हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों को CET-2 परीक्षा में शामिल होने की अंतरिम राहत मिली।

कांग्रेस नेता ने सरकार और आयोग पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जब कोई अभ्यर्थी निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक ला रहा है, तो उसे बाहर करने का आधार क्या है? उन्होंने कहा कि हरियाणा का युवा अब पढ़ाई और तैयारी से ज्यादा भर्ती प्रक्रियाओं में कथित धांधलियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर दिख रहा है। सुरजेवाला ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ “क्रूर मजाक” बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

हालांकि, इस पूरे मामले में Haryana Staff Selection Commission या सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।