कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जनसुराज अभियान से अलग हुए नेताओं के एक समूह ने अब एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया है जिसे राष्ट्रीय नागरिक मोर्चा नाम दिया गया है। इस नई पार्टी ने ऐलान किया है कि वे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी ताल ठोकने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

​राजनीतिक व्यवस्था और विचारधारा का सवाल

​आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चे के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्तिगत द्वेष या प्रशांत किशोर के विरोध तक सीमित नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो पूर्व में आम आदमी पार्टी की बिहार इकाई में को-ऑर्डिनेशन कमिटी के कन्वीनर रह चुके हैं ने कहा कि उनका संघर्ष एक बड़ी राजनीतिक व्यवस्था की खामियों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से राज्य में कुछ गिने-चुने क्षेत्रों का ही राजनीतिक एकाधिकार रहा है जिसके कारण पटना सहित राज्य के कई हिस्सों को न्याय नहीं मिल पाया है।

​जमीनी मुद्दों पर आधारित चुनावी एजेंडा

​पार्टी का मानना है कि बिहार में जनमुद्दों को प्राथमिकता देने वाले एक संगठित ढांचे की भारी कमी है। उनका आंदोलन स्थानीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा। अध्यक्ष ने इसे जनता के साथ हुए पुराने विश्वासघात को सुधारने की एक ईमानदार कोशिश बताया है। उन्होंने मतदाताओं से व्यक्तिगत आकर्षण या जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर केवल विकास के मुद्दों पर निर्णय लेने की अपील की है।

​चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव

​बांकीपुर पहले से ही बिहार की एक हाई-प्रोफाइल सीट मानी जाती है जहां मुकाबला पहले से ही काफी तीव्र है। राष्ट्रीय नागरिक मोर्चा के इस कदम ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को और अधिक जटिल बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नई पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने से वोटों का बिखराव हो सकता है, जिसका सीधा असर वहां के चुनावी परिणामों पर पड़ना निश्चित है।
​पार्टी के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया: हम केवल चुनाव लड़ने नहीं बल्कि एक नई राजनीतिक पारी शुरू करने आए हैं जो पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता इस नए विकल्प को किस हद तक स्वीकार करती है और यह मोर्चा आगामी चुनावों में कितनी बड़ी सेंध लगा पाता है।