Where focus goes, energy flows… हमारी एकाग्रता पहले जैसी नहीं रही, आज यह शिकायत अमूमन सभी रील्स देखने वालों की आम है। मोबाइल स्क्रीन पर लगातार चलने वाली Reels और Social Media Scroll करने की लत ने हमारे मन को चंचला बना दिया है। सेकंड में बदलते तस्वीरों और वीडियोज़ ने हमारे मस्तिष्क को त्वरित आनंद (Instant Gratification) का आदी और ग़ुलाम बना दिया है। यह आदत लगातार हमारे धैर्य और गहराई से सोचने की क्षमता को कम कर रही है।
घंटों तक लगन से एक ही काम में लगे रहने वाले अब मिनटों में भटकने लगे हैं। Reels का सिलसिला हमारे दिमाग को सतही जानकारीयों के लिए अभ्यस्त बना रहा है। चीजों को ठहर कर गहराई से समझने की आदत और क्षमता तिरोहित हो रही है। आपकी उम्र चाहे जो हो अगर आप रील्स देखने में रुचि रखते हैं तो आज ही एक बैठक में किसी किताब का पाँच पन्ना पढ़ कर देख लीजिए और महसुस कीजिए कि कितने मानसिक ख़लल आते हैं। संक्षेप में कहें तो रील देखने की लत से हमारी उत्पादकता (Productivity) और मानसिक शांति दोनों छिन्न-भिन्न हो रही हैं।
चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढम्।
श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं कि मन बहुत चंचल, बलवान और हठी है। इसे वश में करना हवा को रोकने जैसा कठिन है। आज के दौर में एकाग्रता को बनाए रखने के लिए डिजिटल अनुशासन ज़रूरी है। स्क्रीन टाइम को सीमित करना होगा, नियमित ध्यान (Meditation) और अपने समय का सही प्रबंधन करना होगा। लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सबसे ज़रूरी है अपने मन को नियंत्रित रखना। समय है जागरूक होने का, Reels का उपयोग मनोरंजन तक ही सीमित रखें, इस पर भी नज़रें जमाए रखें कि कहीं यह रील्स आपके जीवन की दिशा तो तय नही करने लगी है?

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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