राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली सरकार ने सेंट्रल रिज क्षेत्र के बड़े हिस्से को आरक्षित वन घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के तहत भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के अंतर्गत लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को संरक्षित वन का दर्जा दिया गया है। यह क्षेत्र वन विभाग के पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन रहेगा।
यह आरक्षित वन क्षेत्र सेंट्रल रिज से जुड़ा हुआ है और सरदार पटेल मार्ग तथा राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास के हिस्सों को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य दिल्ली में घटते हरित क्षेत्र को बढ़ाना, प्रदूषण को नियंत्रित करना और जैव विविधता को संरक्षित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जहां भी इस आरक्षित वन क्षेत्र में खाली और उपयुक्त भूमि उपलब्ध होगी, वहां देसी और पर्यावरण अनुकूल प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह निर्णय भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत लिया गया है। इसके तहत लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से कानूनी संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह फैसला पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील रिज क्षेत्रों को मजबूत कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इस प्रक्रिया को पूरा किया है और यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करेगा।
यह आरक्षित वन क्षेत्र सेंट्रल रिज से जुड़ा हुआ है और इसके आसपास राष्ट्रपति भवन एस्टेट और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र भी आते हैं। सरकार ने कहा है कि आरक्षित वन घोषित किए गए क्षेत्रों में जहां भी उपयुक्त भूमि उपलब्ध होगी, वहां देसी और पर्यावरण अनुकूल प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली की घटती हरित संपदा को पुनर्जीवित करना और प्रदूषण को कम करना है।
दिल्ली सरकार ने सेंट्रल रिज क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित कर दिया है। यह फैसला करीब तीन दशक से लंबित प्रक्रिया को पूरा करता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1994 में रिज क्षेत्रों को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन लंबे समय तक इन्हें अंतिम कानूनी संरक्षण नहीं मिल सका। अब सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए सेंट्रल रिज को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत आरक्षित वन घोषित कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सेंट्रल रिज राजधानी के मध्य में स्थित है और यह अपर रिज रोड के दोनों ओर फैला हुआ क्षेत्र है। यह क्षेत्र सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास के महत्वपूर्ण हिस्सों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दिल्ली रिज, प्राचीन अरावली पर्वतमाला का विस्तार है और इसे राजधानी का “ग्रीन लंग्स” माना जाता है। यह क्षेत्र वायु गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता के संरक्षण, भूजल स्तर को मजबूत करने तथा जलवायु परिवर्तन और शहरी प्रदूषण के प्रभावों को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि वर्ष 1994 में दिल्ली के सभी पांच रिज क्षेत्रों को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 के तहत अधिसूचित किया गया था। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए पिछले वर्ष 24 अक्टूबर को दक्षिणी रिज क्षेत्र के लगभग 4080.82 हेक्टेयर हिस्से को आरक्षित वन घोषित किया गया था। अब सेंट्रल रिज के 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को भी आरक्षित वन घोषित किए जाने के साथ ही सरकार अब तक कुल 4754.14 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा दे चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली के सभी रिज क्षेत्रों को जल्द ही भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत आरक्षित वन घोषित किया जाए। इसके लिए संबंधित प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।
पर्यवारण के अनुकूल लगाए जाएंगे पेड़
दिल्ली सरकार ने आरक्षित वन घोषित किए गए रिज क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना बनाई है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन क्षेत्रों में उपयुक्त और खाली भूमि उपलब्ध होगी, वहां देसी और पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएंगे। इनमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे पेड़ शामिल होंगे। सेंट्रल रिज सहित अन्य रिज क्षेत्रों में यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से जैव विविधता का संरक्षण होगा, भूमि की उर्वरता बेहतर होगी और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह कदम राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता सुधारने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस निर्णय से अब इस क्षेत्र को अधिक मजबूत वैधानिक सुरक्षा प्राप्त होगी। इससे अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और पर्यावरणीय क्षरण पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद वन विभाग द्वारा रिज क्षेत्रों में चलाए जा रहे संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन कार्यों को और मजबूती मिलेगी। साथ ही निगरानी व्यवस्था भी पहले से अधिक प्रभावी होगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार वैज्ञानिक वन प्रबंधन, पारिस्थितिक संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार को लेकर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करना है।
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