Supreme Court on hate speech: सुप्रीम कोर्ट ने कथित हेट स्पीच मामले में भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को राहत बरकरार रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने CPM नेता वृंदा करात की 29 अप्रैल के फैसले पर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया, जिसमें अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. उन्हें क्लीन चिट देने वाले फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी. कोर्ट ने एफआईआर की मांग को दोबारा सुनने से मना कर दिया है.
कोर्ट ने कहा था कि कानून में पहले से पर्याप्त व्यवस्था है. दोनों नेताओं के भाषणों के मामले में कोर्ट ने कहा था, ‘रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री और स्टेटस रिपोर्ट हमने सावधानीपूर्वक विचार किया.
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में दिए गए भाषणों को लेकर बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग को दोबारा सुनने से इनकार कर दिया है. हेट स्पीच के एक मामले में क्लीन चिट दिए जाने के फैसले के खिलाफ CPM लीडर वृंदा करात सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं थीं, मगर बेंच ने उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी.
जस्टिस विक्रम नाथ उर जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा था कि “देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को” जैसी बात कहने से किसी संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता. कोर्ट ने कहा था, ‘रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री और स्टेटस रिपोर्ट हमने सावधानीपूर्वक विचार किया. हमारा निष्कर्ष है कि इसमें कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि हालांकि यह भाषण विवादास्पद थे. लेकिन उन्हें किसी खास समुदाय की तरफ इशारा नहीं माना जा सकता.
मामला जनवरी 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों के दिए गए भाषणों से जुड़ा था. अनुराग ठाकुर ने जहां ‘गद्दारों को गोली..’ वाली बात कही थी, वहीं वर्मा ने चेतावनी दी थी कि अगर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका गया, तो वह ‘आखिरकार घरों में घुसकर बलात्कार और हत्या करेंगे.’
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