Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय से दो महत्वपूर्ण न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्ट गायब होने का मामला इन दिनों राज्य की राजनीति में गरमाया हुआ है। इस संवेदनशील मामले को लेकर जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने भी इस विषय को बेहद गंभीरता से लिया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने स्पष्ट किया है कि फाइलों के लापता होने के मामले की गहन जांच चल रही है। कानून मंत्री ने कहा कि सरकार हर पहलू को खंगाल रही है कि किन परिस्थितियों में ये बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट गायब हुईं। क्या इसके पीछे प्रशासनिक स्तर पर कोई घोर लापरवाही थी या फिर फाइलों को गायब करने का कोई अन्य संदिग्ध कारण था, इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है।

गृह विभाग द्वारा भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, गायब हुई रिपोर्टों में 2008 के कंधमाल दंगों (स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड) पर बनी ‘जस्टिस ए.एस. नायडू आयोग’ की रिपोर्ट और 2016 के ‘सम हॉस्पिटल अग्निकांड’ से जुड़ी आरडीसी जांच रिपोर्ट शामिल हैं।

4 जून 2024 को ओडिशा विधानसभा चुनाव के नतीजों के दिन, सीएमओ से कई अन्य सरकारी फाइलें गृह विभाग को वापस लौटा दी गईं, लेकिन ये दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट वापस नहीं आईं। इसी वजह से इन फाइलों को जानबूझकर छिपाने, नष्ट करने या अवैध रूप से हटाने का गहरा संदेह जताया जा रहा है।

कानून मंत्री ने मीडिया को आश्वस्त करते हुए कहा कि जांच पूरी होने के बाद इस पूरे मामले की वास्तविक सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी। सरकार किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और कानून के प्रावधानों के तहत कठोर से कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का भी गठन किया गया है, जो मैन्युअल और डिजिटल दोनों प्रकार के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। जहां एक तरफ सत्तारूढ़ भाजपा इसे पूर्ववर्ती नवीन पटनायक सरकार के समय की प्रशासनिक विफलता और साजिश बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल बीजेडी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। बहरहाल, इस राजनीतिक घमासान के बीच अब सभी की नजरें पुलिस और एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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