दिल्ली पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस ने 2 अलग-अलग अभियानों में 106.25 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली चरस बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 109 करोड़ रुपये आंकी गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में 4 नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई पिछले करीब 6 सप्ताह के दौरान मिली खुफिया जानकारियों के आधार पर की गई।
दो अभियानों में हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तस्करी से जुड़े इनपुट मिलने के बाद टीम ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई शुरू की। इसके बाद दो अलग-अलग अभियानों में प्रतिबंधित मादक पदार्थ की बड़ी खेप बरामद की गई। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि मादक पदार्थ कहां से लाया गया था और इसे दिल्ली में किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। जांच एजेंसियां पूरे तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
29 जून को भी पड़ा था छापा
दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस मामले में पहला ऑपरेशन 29 जून को चलाया गया था। कोटला मुबारकपुर इलाके में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 8.598 किलोग्राम चरस बरामद की। पूछताछ और जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को इस नशीले पदार्थ की सप्लाई चेन के बारे में जानकारी मिली। जांच में सामने आया कि नेटवर्क का एक और संदिग्ध वजीराबाद में गोदाम/स्टोरेज फैसिलिटी चला रहा था। इसके बाद पुलिस ने खुफिया इनपुट के आधार पर बुधवार को वजीराबाद स्थित ठिकाने पर छापेमारी की।
वजीराबाद से 97.652 किलो चरस बरामद
पुलिस के मुताबिक, वजीराबाद के ठिकाने से 13 प्लास्टिक बैग में पैक 97.652 किलोग्राम चरस बरामद की गई। मौके से एक मिक्सिंग मशीन और पैकिंग सामग्री भी जब्त की गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 32 वर्षीय एक नेपाली महिला को भी गिरफ्तार किया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तस्करी के इस नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी और नशीले पदार्थ की सप्लाई कहां से होती थी। पुलिस के अनुसार, दोनों अभियानों में बरामद चरस की कुल मात्रा 106.25 किलोग्राम है। मामले की जांच के जरिए पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
कहां से आ रही थी चरस?
दिल्ली पुलिस की जांच में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े गिरोह के नेटवर्क को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह भारत-नेपाल सीमा पर सोनौली के पास मौजूद अपने संपर्कों के जरिए चरस मंगवाता था। इसके बाद चरस को सड़क मार्ग से दिल्ली लाकर स्टोर किया जाता था और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अलग-अलग इलाकों में इसकी सप्लाई की जाती थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह तक ऑर्डर पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था। भुगतान नकद के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, डिलीवरी के लिए ऑटो-रिक्शा और बाइक टैक्सी का इस्तेमाल किया जाता था।
नेपाल में दो संदिग्ध सप्लायरों की पहचान
जांच के दौरान पुलिस ने नेपाल में मौजूद दो अन्य संदिग्धों की पहचान सप्लायर के तौर पर की है। अब पुलिस उनके नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियां इस मामले में वित्तीय लेन-देन, स्थानीय वितरकों और नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों का पता लगाने में जुटी हैं। पुलिस का उद्देश्य पूरे तस्करी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचना है।
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