रोहित कश्यप, मुंगेली। मुंगेली जिले के नगर पंचायत जरहागांव निवासी सुरेन्द्र कश्यप पिछले लगभग 15 वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के सर्पों का रेस्क्यू कर लोगों की जान बचाने का कार्य कर रहे हैं। पेशे से पार्षद एवं कबड्डी कोच सुरेन्द्र कश्यप भारतीय जनता पार्टी समर्थित जनप्रतिनिधि भी हैं। क्षेत्र में लोग उन्हें “सर्प मित्र” के नाम से जानते हैं। अब तक वे करीब 500 से अधिक जहरीले एवं गैर जहरीले सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक स्थानों पर छोड़ चुके हैं।

आत्मिक संतुष्टि के लिए शुरू किया सर्प रेस्क्यू

सुरेन्द्र बताते हैं कि उनके घर में पहले अक्सर सांप निकलते थे। शुरुआत में वे डरते थे, लेकिन धीरे-धीरे स्वयं सांपों को पकड़कर सुरक्षित बाहर छोड़ने लगे। इसी दौरान उनका भय समाप्त हो गया और उन्होंने इसे समाज सेवा का माध्यम बना लिया। उनका कहना है कि वे किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि आत्मिक संतुष्टि के लिए यह कार्य करते हैं।

सैकड़ों घरों और सरकारी कार्यालयों में कर चुके हैं रेस्क्यू

सुरेन्द्र अब तक जरहागांव नगर सहित आसपास के गांवों, सैकड़ों घरों, स्कूलों, सरकारी विभागों एवं कार्यालयों में पहुंचकर सर्पों का सफल रेस्क्यू कर चुके हैं। सूचना मिलते ही वे तत्काल मौके पर पहुंचकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर छोड़ देते हैं।

जहरीले सांपों का भी करते हैं सुरक्षित रेस्क्यू

रेस्क्यू के दौरान सुरेन्द्र कई बार अत्यंत विषैले सांपों को भी पकड़ चुके हैं। बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के इस प्रकार का कार्य करना बेहद जोखिम भरा होता है, फिर भी वे लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लगातार यह सेवा कर रहे हैं।

आंगनबाड़ी से एक साथ 19 जहरीले सांपों का किया था रेस्क्यू

सुरेन्द्र ने बताया कि धरमपुरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में एक बार उन्होंने एक साथ इंडियन स्पेक्टेक्ड कोबरा (भारतीय चश्मे वाला नाग)जहरीले सांपों का रेस्क्यू किया था। यह घटना क्षेत्र की सबसे बड़ी सर्प रेस्क्यू घटनाओं में से एक मानी जाती है। समय रहते सांपों को सुरक्षित पकड़ लेने से बड़ी दुर्घटना टल गई।

जरहागांव हाई स्कूल में मिले थे 7 जहरीले सांप के बच्चे

उन्होंने बताया कि जरहागांव हाई स्कूल में भी एक बार 7 इंडियन रॉक पाइथन (भारतीय अजगर)सांप के बच्चों का एक साथ रेस्क्यू किया गया था। स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई कर सभी सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया।

स्नेक बाइट पीड़िता के इलाज में भी निभाई अहम भूमिका

सुरेन्द्र ने एक और महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला को इंडियन स्पेक्टेक्ड कोबरा (भारतीय चश्मे वाला नाग) सांप ने काट लिया था। उपचार के लिए उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों द्वारा परिजनों से यह पूछा जा रहा था कि किस प्रकार के सांप ने काटा है। ऐसे समय में सुरेन्द्र कश्यप उसी सांप को जिंदा रेस्क्यू कर सुरक्षित डिब्बे में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे और डॉक्टरों को दिखाया कि इसी सांप ने महिला को काटा है। इससे डॉक्टरों को उचित इलाज करने में काफी सहायता मिली।

बिना रेस्क्यू किट के कर रहे हैं जोखिम भरा कार्य

इतने वर्षों से लगातार सर्प रेस्क्यू करने के बावजूद सुरेन्द्र कुमार के पास आज भी सर्प रेस्क्यू के आवश्यक सुरक्षा उपकरण (रेस्क्यू किट) उपलब्ध नहीं हैं। वे सीमित संसाधनों में अपनी जान जोखिम में डालकर यह कार्य कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने शासन से की मांग

क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि सुरेन्द्र ने वर्षों से नि:स्वार्थ भाव से लोगों और वन्यजीवों की रक्षा की है। ऐसे में शासन एवं वन विभाग को उन्हें सर्प रेस्क्यू किट, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे और अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से अपनी सेवाएं जारी रख सकें।

इंसानों और वन्यजीवों दोनों की रक्षा करना मेरा उद्देश्य- सुरेन्द्र

सुरेन्द्र कश्यप ने कहा कि “मैं पिछले लगभग 15 वर्षों से लोगों की सुरक्षा और सांपों के संरक्षण के उद्देश्य से सर्प रेस्क्यू कर रहा हूं। मेरा उद्देश्य किसी जीव की हत्या नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों दोनों की रक्षा करना है। यह कार्य मैं केवल आत्मिक संतुष्टि के लिए करता हूं। यदि शासन द्वारा आवश्यक रेस्क्यू किट और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएं, तो मैं और अधिक सुरक्षित तरीके से लोगों की सेवा कर सकूंगा।”

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