आशुतोष द्विवेदी, रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सरकारी दावों और विकास की जमीनी हकीकत को बयां करती एक बेहद झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गुढ़ तहसील और रायपुर कर्चुलियान ब्लॉक के ग्राम रेरुआ खुर्द में सड़क की बदहाली के कारण एक प्रसूता को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में कीचड़ के बीच ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। गांव तक एंबुलेंस न पहुंच पाने और निजी वाहन के कीचड़ में फंसने से मां और नवजात की जान पर बन आई थी। इस घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और बदहाल बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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5 साल से बदहाल सड़क; 3 किलोमीटर दूर खड़ी रह गई एंबुलेंस

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम रेरुआ खुर्द में पिछले करीब 5 वर्षों से सड़क पूरी तरह से जर्जर और बदहाल स्थिति में है। बारिश के मौसम में पूरी सड़क कीचड़ और पानी से लबालब हो जाती है। बीती रात जब गांव की एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन किया। हालांकि, सड़क पर फैले दलदल के कारण एंबुलेंस गांव से करीब 3 किलोमीटर पहले ही रुक गई और आगे जाने से असमर्थता जता दी।

कीचड़ में फंसा वाहन, रास्ते में गूंजी मासूम की किलकारी

एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए परिजनों ने आनन-फानन में एक निजी वाहन का सहारा लिया। लेकिन बदकिस्मती से प्रसूता को ले जा रही गाड़ी भी गांव के कीचड़ भरे रास्ते में बुरी तरह फंस गई। महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय होती देख परिजनों और ग्रामीणों को रास्ते में ही डिलीवरी करानी पड़ी। गनीमत रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन घटना के दौरान पूरे गांव में चिंता और खौफ का माहौल बना रहा।

सरपंच की अनदेखी से आक्रोश; विधायक नागेंद्र सिंह और प्रशासन से गुहार

घटना के बाद से ही ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सरपंच सुरेश साकेत को कई बार इस सड़क की दुर्दशा से अवगत कराया गया, लेकिन समस्या को लगातार अनदेखा किया गया। अब आक्रोशित ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक नागेंद्र सिंह और रीवा जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सड़क का निरीक्षण कर बारिश में आवागमन बहाल कराया जाए और जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण हो।

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ग्रामीणों का सीधा सवाल “अगर बदहाल सड़क की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं आ सकती, तो आपात स्थिति में ग्रामीणों की जिंदगी और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?”

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