सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशा-निर्देशों के बाद रेवाड़ी जिला एवं सत्र न्यायालय में वकीलों द्वारा किया जा रहा कार्य बहिष्कार समाप्त हो गया है। बुधवार को बार और बेंच ने आपसी संवाद के जरिए विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया।
धनेश, रेवाड़ी। सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा बार और बेंच के बीच विवादों पर संज्ञान लिए जाने का सकारात्मक असर रेवाड़ी में देखने को मिला है। जिला एवं सत्र न्यायालय में पिछले कई दिनों से वकीलों द्वारा किया जा रहा कार्य बहिष्कार बुधवार को समाप्त हो गया। बार और बेंच के सदस्यों ने आपस में मिल-बैठकर विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ज्योमाल्या बागची की खंडपीठ ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान बार और बेंच के बीच सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया था, जिसका प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
समाधान समितियों के गठन पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए सुझाव दिया था कि जिला और तालुका स्तर पर ऐसी ‘समाधान समितियां’ गठित की जानी चाहिए, जो बार और बेंच के विवादों का समय रहते निपटारा कर सकें। इन समितियों में बार काउंसिल और बार एसोसिएशन के सदस्यों को शामिल करने की बात कही गई है। खंडपीठ ने न्यायाधीशों को भी सलाह दी कि वे धैर्य, करुणा और प्रोत्साहन की भावना से कार्य करें ताकि युवा अधिवक्ता न्यायपालिका के प्रति आकर्षित हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुशासन और नैतिकता केवल बार के लिए ही नहीं, बल्कि बेंच के लिए भी उतनी ही अनिवार्य है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की निष्पक्ष भागीदारी की अपील
‘न्याय आपके द्वार’ अभियान के संयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चौहान ने सर्वोच्च न्यायालय की इन सिफारिशों का स्वागत किया है। उन्होंने अपील की है कि प्रस्तावित समाधान समितियों में केवल राजनीतिक या चुनावी गुटबाजी से जुड़े लोग ही न हों, बल्कि उन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी शामिल किया जाए जो गुटबाजी से तटस्थ और निष्पक्ष हों। रेवाड़ी में विवाद सुलझने के बाद अब अदालती कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो गया है, जिससे वादकारियों (Litigants) ने राहत की सांस ली है। इस बैठक में बार और बेंच के बीच भविष्य में बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी सहमति बनी।
युवा अधिवक्ताओं के भविष्य पर केंद्रित निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं का जिक्र किया था। बेंच का मानना है कि यदि न्यायपालिका का माहौल तनावपूर्ण रहेगा, तो प्रतिभाशाली युवा इस क्षेत्र में करियर बनाने से हिचकिचाएंगे। रेवाड़ी बार ने इन निर्देशों का पालन करते हुए यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि किसी भी प्रकार की असहमति को विरोध के बजाय संवाद के जरिए हल किया जाए। यह निर्णय जिला न्यायपालिका में कार्यकुशलता और आपसी विश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

