दुनिया भर में अब मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत के नेतृत्व को स्वीकार किया जाने लगा है. फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) पूरी दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने पर काम करती है और आतंकवादी संगठनों को होने वाली फंडिंग पर नजर रखती है. अंतरराष्ट्रीय संस्था FATF ने भारतीय अधिकारी विवेक अग्रवाल को पहली बार अपना उपाध्यक्ष चुना है.
FATF ने शुक्रवार को अपनी ताजा समीक्षा रिपोर्ट और सिफारिशें जारी कीं, जिसमें नेपाल को ग्रे लिस्ट में ही रखने का फैसला किया गया है. इसके पहले FATF की क्षेत्रीय ब्रांच ने नेपाल को ब्लैक लिस्ट में डालने की चेतावनी दी ब्लैक लिस्ट में डालने की चेतावनी दी थी.
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने भारत के सीनियर अफसर विवेक अग्रवाल को उपाध्यक्ष चुना है. IAS अधिकारी और वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. उनका कार्यकाल जुलाई 2026 से जून 2027 तक रहेगा.

FATF ने शुक्रवार को अपनी ताजा समीक्षा रिपोर्ट और सिफारिशें जारी कीं, जिसमें नेपाल को बढ़ी हुई निगरानी वाले अधिकार क्षेत्र में ही बनाए रखा गया है. इसका कारण है कि FATF की क्षेत्रीय शाखा एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ने कई बार चेतावनी दी थी लेकिन नेपाल उम्मीद के अनुसार काम नहीं कर पाया है.
भारत को यह उपाध्यक्ष पद मिलने के बाद पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डालने की मांग उठने लगी है. भारत को यह पद मिलने के कारण पाकिस्तान पर नजर रखने में मदद मिलेगी. पाकिस्तान पर भी मनी लॉन्ड्रिंग के जरिये आतंकवाद को वित्तीय मदद देने का आरोप रहा है.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि FATF में यह जिम्मेदारी मिलने से आतंकवाद और अवैध धन के खिलाफ भारत की लड़ाई और मजबूत होगी.

पाकिस्तान जून 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था और अक्टूबर 2022 में उसे ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया. लेकिन भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अब भी कुछ चरमपंथी संगठनों के खिलाफ पूरी कार्रवाई करने में विफल रहा है. इसलिए वह पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल कराने की कोशिश करेगा.
भारत के अनुसार पाकिस्तान अभी भी FATF की कुछ शर्तें पूरी नहीं कर पाया है. हालांकि पाकिस्तान के विशेषज्ञ इस खतरे को उतना बड़ा नहीं मानते. फिलहाल FATF की ग्रे लिस्ट में 18 देश हैं. वहीं ईरान, उत्तर कोरिया और म्यांमार ब्लैक लिस्ट में शामिल हैं. ग्रे लिस्ट में आने पर किसी देश को विदेशी निवेश, कर्ज और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
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