कुंदन कुमार/पटना। राजधानी पटना स्थित विधानसभा परिसर का माहौल आज उस वक्त पूरी तरह से गरमा गया, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायकों और विधान पार्षदों ने हाथों में तख्तियां लेकर और मुंह तथा बांह पर काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। राजद सदस्यों ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से इस्तीफे की मांग की।

​नीट पेपर लीक मामले पर विपक्ष का आक्रामक रुख

​प्रदर्शन के दौरान राजद विधायक रणविजय साहू ने मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश भर में चर्चा का विषय बने नीट (NEET) पेपर लीक मामले में जिस तरह के तथ्य और स्थितियां सामने आई हैं, उसके बाद नैतिकता के आधार पर केंद्र सरकार को खुद आगे आकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लेना चाहिए था।
​विधायक रणविजय साहू ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर देश और राज्य के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का रवैया इतना उदासीन क्यों है? विपक्ष लगातार सदन से लेकर सड़क तक इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इस पर जवाब देने से पूरी तरह बच रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने वाला नहीं है और जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

​बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था और बंटी यादव हत्याकांड पर उठे सवाल

​नीट मामले के साथ-साथ राजद नेताओं ने बिहार की कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। विधायक रणविजय साहू ने राज्य में बढ़ते अपराधों का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने विशेष रूप से बंटी यादव हत्याकांड का जिक्र करते हुए पूछा कि इस सनसनीखेज मामले में अब तक पुलिस ने ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की?
​उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मामले की दिशा मोड़ने का प्रयास कर रही है। बंटी यादव हत्याकांड को शराब तस्करी के झूठे आरोपों और मामलों का नया रूप देकर पुलिस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से भागने की कोशिश कर रही है। रणविजय साहू ने तीखा सवाल किया कि यदि पुलिस और प्रशासन ही इस तरह पीड़ितों के साथ नाइंसाफी करेंगे तो राज्य की आम जनता को न्याय कौन दिलाएगा? सरकार को इन तमाम संगीन मामलों पर सदन में आकर स्पष्ट जवाब देना ही होगा।