दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश नर्मदापुरम जिले के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर सामने आई है। मटकुली रेंज के नयाखेड़ा क्षेत्र में 4 माह के बाघ शावक का शव बरामद हुआ है। बीते 9 महीनों के भीतर STR और आसपास के इलाकों में बाघों की मौत का यह पांचवां मामला है, जिसने रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो बाघों के बीच भीषण संघर्ष की आवाजें
नयाखेड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 460 में तैनात फॉरेस्ट गार्ड ने दो बाघों के बीच भीषण संघर्ष की आवाजें सुनीं। बाघों की तेज दहाड़ से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने गश्त शुरू की। रात के अंधेरे में एक शावक मृत पाया गया। सुरक्षा कारणों से पूरी रात घटनास्थल की निगरानी की गई। वरिष्ठ अधिकारियों और NTCA के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि प्रथम दृष्टया शावक के शरीर पर गहरे घाव और चोट के निशान मिले हैं।
नर और मादा बाघ दोनों के पदचिह्न पाए गए
घटनास्थल पर नर और मादा बाघ दोनों के पदचिह्न पाए गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि किसी अन्य वयस्क बाघ के हमले की वजह से शावक की जान गई है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 9 महीनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अगस्त में मढ़ई क्षेत्र में आपसी संघर्ष में बाघ की मौत। फिर दिसंबर, जनवरी में चूरना क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ का शव मिला (शिकार की आशंका)। जनवरी में तवा नगर क्षेत्र में बाघिन की बीमारी से मौत।
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वन्यजीव प्रेमियों के बीच गहरी चिंता
मार्च में छिंदवाड़ा सीमा पर दफन मिला बाघ (करंट या जहर की आशंका) इसके बाद अप्रैल में अब मटकुली रेंज में शावक की मौत। निर्धारित SOP के तहत डॉ. गुरुदत्त शर्मा और डॉ. अमित ओढ़ की टीम ने शावक का पोस्टमार्टम किया। पंचनामा और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के बाद अधिकारियों की उपस्थिति में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।

